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Bank Loan Scam: रिकॉर्ड लेने धर्मशाला-मंडी पहुंची विजिलेंस


Shimla. शिमला। विजिलेंस ने 20 करोड़ के बैंक लोन घोटाले को लेकर जांच तेज कर दी है। बैंक लोन घोटाले के मामले की जांच के लिए विजिलेंस की दो टीमें बैंक लोन से संबंधित रिकार्ड लाने के लिए मंडी और धर्मशाला गई हैं। बैंस पर आरोप है कि मंडी और मनाली में होटल बनाने के मकसद से लोन लिया था। बताया जा रहा है कि मंडी में कुछ काम हुआ है, जबकि मनाली में एक भी ईंट नहीं लगी है। ऐसे में बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि कैसे लोन दिया गया, विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में बैंक अधिकारियों से पूछताछ की है। यह भी पता चला है कि विजिलेंस की ओर से दर्ज मामले की जानकारी नाबार्ड, आयकर विभाग और आरबीआई को दी गई है। 20 करोड़ रुपए के बैंक लोन घोटाले के मामले में 31 जनवरी को अदालत में सुनवाई होगी। विजिलेंस की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने लोने के लिए फर्जी यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट

बना दिया।

पांच करोड़ रुपए की अगली किस्त लेने के लिए इसे कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड में दिया गया। बताया जा रहा है कि लोन की पहली किस्त के बाद मौके पर प्रोजेक्ट का कितना काम हुआ है, बैंक अधिकारियों ने इसका जायजा नहीं लिया। विजिलेंस ने मामले की जांच के लिए विभिन्न बैंकों के विशेषज्ञ बुलाए हैं। ये विशेषज्ञ एजीएम, मैनेजर, कैशियर स्तर के हैं। ये केसीसीबी की ओर से बैंस को दिए गए लोन संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहे हैं। विजिलेंस ब्यूरो की दो टीमें मंडी और धर्मशाला गई हैं। इन्हें केसीसीबी की ओर से बैंस को दिए गए लोन से संबंधित रिकार्ड लाने को भेजा गया है। हालांकि, इससे पहले भी धर्मशाला से रिकार्ड लाया जा चुका है। होटल बनाने के नाम 20 करोड़ के लोन घोटाले की जांच एसपी वीरेंद्र कालिया को सौंपी गई है। बैंक लोन की राशि किन खातों में ट्रंासफर की गई है, विजिलेंस इसका भी पता लगा रही है।

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