सोसायटी में गार्ड सोते मिले, बाउंड्री फांद कर घुस रहे चोर-बदमाश

Raipur. रायपुर। राजधानी के राजीव नगर क्षेत्र स्थित जीवन निकेतन सोसायटी में बिल्डर की मनमानी, लापरवाही और दबंगई के खिलाफ अब रहवासी मुखर होते जा रहे हैं। वर्षों से अपने खून-पसीने की कमाई से घर खरीदने वाले इन परिवारों को आज असुरक्षा, असुविधा और उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। सोसायटी में मेंटेनेंस के नाम पर मोटी रकम तो वसूली जाती है, लेकिन बदले में ना तो सुरक्षा की व्यवस्था है और ना ही साफ-सफाई या बुनियादी सुविधाएं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब आए दिन चोरी की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन बिल्डर न तो जवाबदेही ले रहा है और न ही जिम्मेदारी निभा रहा है।

❌ मेंटेनेंस के नाम पर वसूली, लेकिन सुविधाएं नदारद

रहवासियों का आरोप है कि हर महीने उन्हें मेंटेनेंस के नाम पर शुल्क देना पड़ता है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। सोसायटी में न तो पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा गार्डों की उचित तैनाती है। जिन गार्डों को नियुक्त किया गया है, उनकी कोई जवाबदेही तय नहीं है। कई बार गार्ड ड्यूटी के दौरान सोते पाए गए हैं, जिससे चोरों के लिए परिसर में प्रवेश करना और घटनाएं अंजाम देना आसान हो गया है।

🚨 वाहन चोरी पर कोई जिम्मेदारी नहीं

हाल ही में एक निवासी की बाइक परिसर से चोरी हो गई। जब पीड़ित ने यह बात बिल्डर के प्रतिनिधियों को बताई, तो उन्होंने न केवल बदसलूकी की बल्कि यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “थाने जाओ, हम क्या कर सकते हैं?” इससे स्पष्ट है कि बिल्डर और उसका स्टाफ पूरी तरह से जिम्मेदारियों से भाग रहा है और रहवासियों की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।

🌧 सीपेज और गंदगी से परेशान हैं लोग

जीवन निकेतन के रहवासी सीपेज की गंभीर समस्या से भी जूझ रहे हैं। बारिश के मौसम में लोगों के घरों में पानी भर जाता है, दीवारें गीली हो जाती हैं और सीलन की वजह से छतों से पानी टपकता है। वहीं, पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण नलों से केंचुए तक निकल रहे हैं, जिससे

स्वास्थ्य संकट

पैदा हो गया है। जब लोग इस संबंध में बिल्डर से शिकायत करते हैं तो जवाब मिलता है – “हमारा काम मकान बेचना था, अब आप रह रहे हो तो छोटा-मोटा काम तो खुद करना ही पड़ेगा।” ऐसे जवाब से लोगों का आक्रोश और अधिक बढ़ गया है।

📄 नामांतरण की झूठी गारंटी

जब लोगों ने मकान खरीदे थे, तब बिल्डर ने उन्हें रजिस्ट्री के बाद नामांतरण (mutation) की गारंटी दी थी। लेकिन सालों बीत जाने के बावजूद भी अब तक कई रहवासियों का नामांतरण नहीं हुआ है। जब उनसे संपर्क किया जाता है तो बिल्डर टालमटोल करते हुए कहते हैं – “हमने मकान बेच दिया, अब आप खुद देखो।”

🛑 सुरक्षा नाम की कोई व्यवस्था नहीं

सोसायटी की बाउंड्री वॉल इतनी कमजोर है कि लोग आसानी से उसे फांदकर परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। कोई विज़िटर एंट्री रजिस्टर नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति का आना-जाना पूरी तरह से अनियंत्रित है। रहवासियों ने अपने स्तर पर कैमरे लगाए, लेकिन उनकी मेंटेनेंस की कोई व्यवस्था नहीं है। बिल्डर द्वारा मेंटेनेंस चार्ज न देने पर रहवासियों को धमकियां दी जाती हैं। कई बार पानी और बिजली की आपूर्ति रोक दी जाती है। इतना ही नहीं, रहवासियों को नोटिस भेजकर मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। यह स्थिति अब एक सामाजिक उत्पीड़न का रूप ले चुकी है, जिससे परिवारों में असुरक्षा और भय का माहौल है।

📢 रहवासियों की मांग: हो उचित जांच और कार्रवाई

रहवासियों की मांग है कि शासन-प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करे। साथ ही बिल्डर को सोसायटी की मेंटेनेंस और बुनियादी सुविधाएं देने के लिए बाध्य किया जाए। यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है तो रहवासी सामूहिक रूप से न्याय के लिए आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं। यह मामला न केवल एक सोसायटी की उपेक्षा का है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों के भविष्य, सुरक्षा और अधिकार से जुड़ा है जो शहरीकरण के नाम पर अब असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

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