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चिनाब पुल ने दिलों को भी जोड़ा हैः टी.जी. सीथाराम


New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल चिनाब ब्रिज के निर्माण में प्रारंभ से ही जुड़े रहे ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर टी. जी. सीथाराम ने जम्मू को कश्मीर से जोड़ने वाली इस पूरी परियोजना को अति विशिष्ट बताते हुए कहा कि चिनाब ब्रिज विश्व का एक नया अजूबा है, जिसका निर्माण भारतीय इंजीनियरों ने किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर को हर मौसम में जोड़ने के लिए तैयार किए गए इस पुल ने दिलों को भी जोड़ा है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल

नेतृत्व में देश के हर नागरिक की इसमें जबरदस्त भूमिका है। इंजीनियरिंग की मिसाल इस ब्रिज का सपना साकार करने में हजारों इंजीनियरों और श्रमिकों ने महती भूमिका अदा की है। चिनाब ब्रिज के निर्माण की अद्वितीय यात्रा को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “2005 में जब पहली बार मैंने चिनाब घाटी में कदम रखा, तब मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मैं इतिहास के निर्माण का हिस्सा हूँ। वहां की भौगोलिक स्थिति अत्यंत कठिन थी, जमीन अस्थिर थी और अपेक्षाएँ बहुत ऊँची।

फिर भी हमारा विजन स्पष्ट था कि हम केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, राष्ट्रीय गौरव का निर्माण करने वाले हैं।” कश्मीर की पर्याय चिनाब नदी के ऊपर 359 मीटर की ऊंचाई पर बने इस पुल को “विज्ञान, आत्मा और राष्ट्रीय चेतना की यात्रा” बताते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्षों की इस प्रक्रिया में हजारों इंजीनियरों, श्रमिकों और वैज्ञानिकों का समर्पण समाहित है। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की टीम के साथ पुल के निर्माण में अपनाए गए लचीले दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला, जिसमें रीयल टाइम फील्ड डेटा, एडवांस सिमुलेशन और समावेशी

तकनीक का बेहतर इस्तेमाल शामिल था, ताकि भौगोलिक अस्थिरता और दुर्गम इलाकों की चुनौती पर फतह हासिल की जा सके। प्रो. सीथाराम ने कहा कि “हर कील, हर नींव और सपोर्ट केवल तकनीकी नहीं, बल्कि विश्वास का निर्माण था। इंजीनियरिंग सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। चिनाब ब्रिज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि समर्पण, विज्ञान और राष्ट्र के प्रति प्रेम से असंभव भी संभव बन जाता है। अगर हम चिनाब पर पुल बना सकते हैं तो युवा भारत किसी भी ऊंचाई को छू सकता है।

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