चिनाब पुल ने दिलों को भी जोड़ा हैः टी.जी. सीथाराम

नेतृत्व में देश के हर नागरिक की इसमें जबरदस्त भूमिका है। इंजीनियरिंग की मिसाल इस ब्रिज का सपना साकार करने में हजारों इंजीनियरों और श्रमिकों ने महती भूमिका अदा की है। चिनाब ब्रिज के निर्माण की अद्वितीय यात्रा को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “2005 में जब पहली बार मैंने चिनाब घाटी में कदम रखा, तब मुझे अंदाज़ा नहीं था कि मैं इतिहास के निर्माण का हिस्सा हूँ। वहां की भौगोलिक स्थिति अत्यंत कठिन थी, जमीन अस्थिर थी और अपेक्षाएँ बहुत ऊँची।
तकनीक का बेहतर इस्तेमाल शामिल था, ताकि भौगोलिक अस्थिरता और दुर्गम इलाकों की चुनौती पर फतह हासिल की जा सके। प्रो. सीथाराम ने कहा कि “हर कील, हर नींव और सपोर्ट केवल तकनीकी नहीं, बल्कि विश्वास का निर्माण था। इंजीनियरिंग सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। चिनाब ब्रिज इस बात का जीवंत प्रमाण है कि समर्पण, विज्ञान और राष्ट्र के प्रति प्रेम से असंभव भी संभव बन जाता है। अगर हम चिनाब पर पुल बना सकते हैं तो युवा भारत किसी भी ऊंचाई को छू सकता है।




