अमित जोगी को हाईकोर्ट ने दिया तगड़ा झटका, जग्गी हत्याकांड में तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आया फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को बड़ा झटका दिया है। बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए तीन हफ्तों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की विशेष डिवीजन बेंच ने सुनाया।

दरअसल, वर्ष 2003 में हुए इस हत्याकांड में पहले सबूतों की कमी के कारण अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की अपील और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला दोबारा हाईकोर्ट में खोला गया। जांच एजेंसी ने करीब 11 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोबारा सुनवाई कर उन्हें दोषी ठहराया।

सुनवाई के दौरान मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अदालत में कहा कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। वहीं, फैसले के बाद अमित जोगी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें पूरा पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया और यह निर्णय उनके लिए चौंकाने वाला है।

गौरतलब है कि 2007 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दिया था, लेकिन इस फैसले को सीबीआई और शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर खारिज की गई सीबीआई की अपील को फिर से बहाल कर दिया, जिसके बाद इस मामले में दोबारा सुनवाई हुई और अब हाईकोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया है।


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