‘चांद-मंगल पर भी मेयर बिठा देगी BJP’: नगर निकाय चुनावों में ‘सत्ता के खेल’ पर सामना का तीखा प्रहार

'चांद-मंगल पर भी मेयर बिठा देगी BJP': नगर निकाय चुनावों में 'सत्ता के खेल' पर सामना का तीखा प्रहार

मुंबई, 9 फरवरी: महाराष्ट्र (Maharashtra) में नगर निकाय चुनावों (Municipal Corporation Elections) के नतीजे आने और नए मेयरों (Mayors) की नियुक्ति के साथ ही प्रशासक राज का दौर खत्म हो गया है. हालांकि, शिवसेना (Shivsena) (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सोमवार को पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ (Samana) के संपादकीय में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा गया कि सत्ता और पैसे के दम पर भाजपा “अनैतिक तरीके से” नगर निकायों पर कब्जा कर रही है.

‘चांद और मंगल पर भी मेयर बना देगी भाजपा’

​सामना ने अपने संपादकीय में तंज कसते हुए लिखा कि भाजपा 11 में से 10 नगर निगमों में अपने मेयर बिठाने की तैयारी में है. लेख में आरोप लगाया गया, “सत्ता, पैसा और पुलिस बल के नियंत्रण के साथ भाजपा ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे वह कहीं भी—यहाँ तक कि चांद या मंगल ग्रह पर भी—अपना मेयर बिठा सकती है और ‘हिंदू-मराठी’ गौरव का ढोल पीट सकती है.”

मुंबई में ऋतु तावड़े और मराठी चेहरा कार्ड

​मुंबई में भाजपा ने ऋतु तावड़े को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है. शिवसेना (UBT) का दावा है कि उद्धव गुट द्वारा ‘मराठी अस्मिता’ के मुद्दे को आक्रामक रूप से उठाने के कारण भाजपा को रणनीतिक रूप से एक मराठी चेहरा सामने लाना पड़ा. संपादकीय में तंज कसा गया कि एक तरफ ऋतु तावड़े बांग्लादेशियों को निकालने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार का बजट बांग्लादेश को बड़ी आर्थिक सहायता देता है.

सत्ता के लिए ‘वैचारिक समझौता’ और दलबदल

​ठाकरे गुट ने भाजपा और शिंदे गुट पर सत्ता की खातिर अपनी विचारधारा छोड़ने का भी आरोप लगाया। संपादकीय के अनुसार:

  • ​कल्याण-डोंबिवली और नासिक में मनसे (MNS) के पार्षदों का शिंदे गुट में शामिल होना लोकतंत्र के लिए घातक है.
  • ​मालेगांव में सत्ता पाने के लिए कथित तौर पर ‘इस्लाम पार्टी’ के साथ गठबंधन की कोशिशों का जिक्र करते हुए ‘हिंदुत्व’ के मुद्दे पर सवाल उठाए गए.
  • ​चुनाव जीतने के तुरंत बाद पाला बदलने वाले पार्षदों को ‘राजनीतिक दीमक’ करार दिया गया.

महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति पर ‘काला बादल’

​सामना ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मंत्रिमंडल पर भी निशाना साधा. लेख में आरोप लगाया गया कि मंत्री सरेआम दल और चुनाव चिह्न के आधार पर फंड बांटने की बात करते हैं, जो सरकारी धन का गबन है. संपादकीय के शब्दों में, “भाजपा ने महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति को गटर बना दिया है और नेतृत्व उसी गटर में पैर लटकाकर बैठा है.




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