नक्सलियों के हथियार निर्माण नेटवर्क पर सबसे बड़ी कार्रवाई

Narayanpur. नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और जिला पुलिस बल ने संयुक्त अभियान में अबूझमाड़ के अंदरूनी जंगलों से नक्सलियों के हथियार निर्माण नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक सामग्री, मशीनरी और कच्चा माल बरामद किया है। इस कार्रवाई को माओवादी गतिविधियों की रीढ़ तोड़ने वाली बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह पूरी कार्रवाई थाना सोनपुर क्षेत्र के अंतर्गत कोरसकोड़ों–पांगुड–कंदुलपार के घने जंगलों में की गई।

जहां नक्सलियों ने हथियार बनाने के लिए एक गुप्त डंप छिपाकर रखा था। खुफिया एजेंसियों से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर डीआरजी की टीम ने इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में हाल ही में बीएसएफ (BSF) के सहयोग से स्थापित किए गए कोरस्कोडो कैंप की रणनीतिक मौजूदगी ने अहम भूमिका निभाई। सुरक्षाबलों को जंगलों के भीतर जिस तरह का डंप मिला, वह किसी छोटे हथियार कारखाने से कम नहीं था। पुलिस के अनुसार, नक्सली यहां आईईडी, बीजीएल और देशी हथियारों के निर्माण के लिए लंबे समय से कच्चा माल और मशीनरी जमा कर रहे थे। बरामद सामग्री से यह स्पष्ट है कि माओवादी संगठन बड़े पैमाने पर हमलों की तैयारी में जुटे हुए थे।

बरामद सामग्री में शामिल हैं-

लगभग 1000 किलोग्राम एल्युमीनियम, जो अलग-अलग साइज की छड़ों के रूप में था और विस्फोटक उपकरणों के निर्माण में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा 1200 से अधिक लोहे के पाइप बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल बीजीएल सेल और बम बनाने में किया जाना था। सुरक्षाबलों ने मौके से 82 बीजीएल सेल, 46 तीर-धनुष बीजीएल, 14 एसएलआर की खाली मैगजीन, पिस्टल मैगजीन, ग्राइंडर मशीन, इलेक्ट्रिक कटर, टुलू मोटर, वेल्डिंग इलेक्ट्रोड होल्डर और वेल्डिंग से जुड़ा अन्य सामान भी जब्त किया है। विशेष बात यह रही कि यह पूरी कार्रवाई बिना किसी मुठभेड़, जनहानि या सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाए सफलतापूर्वक पूरी की गई। अधिकारियों के अनुसार, यदि यह हथियार और विस्फोटक सामग्री नक्सलियों के हाथों में पहुंच जाती, तो आने वाले समय में बड़े हमलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

इस सफलता के पीछे नारायणपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “माड़ बचाओ अभियान” को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सड़क, पुल, संचार सुविधाओं और सुरक्षा कैंपों के विस्तार से अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों में पुलिस और प्रशासन के प्रति ग्रामीणों का भरोसा लगातार बढ़ा है। इसी विश्वास के चलते ग्रामीण अब नक्सलियों की गतिविधियों और उनके ठिकानों की जानकारी सुरक्षाबलों तक पहुंचाने लगे हैं, जिससे ऐसे बड़े ऑपरेशन संभव हो पा रहे हैं। नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने इस कार्रवाई को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी के साथ क्षेत्र में शांति और विकास के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की सप्लाई चेन को तोड़ना हमारी प्राथमिकता है और इस तरह की कार्रवाइयों से माओवादी संगठनों की ताकत लगातार कमजोर होगी। एसपी ने यह भी दोहराया कि तय समय सीमा में नक्सलमुक्त बस्तर का लक्ष्य हर हाल में हासिल किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में मशीनरी और कच्चे माल की बरामदगी से अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय माओवादी संगठनों को हथियारों और विस्फोटकों की आपूर्ति करना बेहद कठिन हो जाएगा। इससे नक्सलियों की परिचालन क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा और सुरक्षाबलों को आगे और मजबूत बढ़त मिलेगी। कुल मिलाकर, नारायणपुर में हुई यह कार्रवाई न सिर्फ नक्सलियों के हथियार निर्माण नेटवर्क पर गहरी चोट है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में भी शासन-प्रशासन की पकड़ मजबूत हो रही है। यह अभियान आने वाले समय में बस्तर अंचल में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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