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नारद प्रसंग से पत्रकार जगत को प्रेरणा दी: कथा आचार्य महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी


Nagdaनागदा- आज तृतीय दिवस में महा मंडलेश्वर श्री वर्षा जी नागर द्वारा रामायण के विभिन्न चरित्र सुनाए, जिसमें शिव जी का माता पार्वती के साथ धूमधाम से हुआ और यह बताया कि सृष्टि में सर्व प्रथम बारात एवं ढोल बाजे के साथ विवाह की परंपरा किसी ने शुरू की है तो वे साक्षात महादेव है। महासती पार्वती से विवाह करने भगवान शिव पहली बार लेकर पहुंचे थे, जब से विवाह में बारात लेकर जाने की परंपरा शुरू हुई। महादेव की बारात में भूत, पिशाच, देवगन, इंद्र, ब्रह्मा विष्णु सभी सम्मिलित हुए। सूर्पनखा की कहानी सुनाइए जिसमें बताया गया कि माया से बचकर रहना चाहिए तथा माया में फंसकर ही जीवन का विनाश होता है। नारद प्रसंग एवं नारद चरित का व्याख्यान किया, जिसमें पत्रकार जगत के लिए संदेश दिया कि जब कोई माया मोह के साथ आती है तो वह विनाश करती है जैसे की सीता माता रूपी माया को रावण हार कर ले गया था और इस माया के कारण रावण के संपूर्ण वंश का विनाश हुआ। जबकि राजा दशरथ को भूमि पुत्री के रूप में सीता रूपी माया प्राप्त हुई थी जिसे बेटी के रूप में राजा दशरथ ने स्वीकार किया तो वह सृजन का रूप होकर भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम की अर्धांगिनी बनी। अंतःकरण में पहले विचार जन्म लेते हैं उसके बाद इस विचार के अनुसार वह आचरण करता है इसलिए अपने विचारों को हमेशा शुद्ध रखें। शरीर गंगा से पवित्र नहीं होता शरीर आपके विचारों की शुद्धि से पवित्र होता है इसलिए गंगा स्नान भी आपको मोक्ष तब ही दिला सकता है जब आप अपने कर्म एवं विचारों के प्रति सजग रहेंगे। युवा पीढ़ी के लिए आदर्श स्वरूप सबसे कम उम्र की महा मंडलेश्वर बनी कथा व्यास महामंडलेश्वर श्री श्री अन्नपूर्णा गिरी वर्षा नागर जी युवाओं को प्रेरणा देने के लिए विभिन्न रामायण के प्रसंग सुनाए।

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