पंचायत चुनाव में देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को लगाई फटकार

मामले की सुनवाई को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने जानकारी दी कि मंगलवार को यह मामला कोर्ट में आया था। उस समय अदालत ने राज्य सरकार के वकील को निर्देश दिया था कि वे सरकार से जरूरी निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में जानकारी दें। इसके बाद मामला बुधवार को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। बुधवार को सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि सरकार ने 19 मई को एक ओबीसी आयोग का गठन किया है, जिसका कार्यकाल छह महीने का है। सरकार का कहना था कि आयोग अपनी रिपोर्ट छह महीने में तैयार करेगा और उसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर निर्णय लिया जाएगा। सरकार की दलील थी कि रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
अदालत ने सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया में देरी स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और इसमें खालीपन नहीं छोड़ा जा सकता। सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि राज्य निर्वाचन आयोग 10 जुलाई तक चुनाव का पूरा कार्यक्रम पेश करे। साथ ही ओबीसी आयोग को भी निर्देश दिया गया कि वह अपनी रिपोर्ट उसी तारीख तक अदालत के सामने प्रस्तुत करे।
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