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सूखी जमीन पर खेती के कमाऊ तरीके ढूंढो

Solan. सोलन। डा. यशवंत सिंह परमार औद्योनिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में जलवायु लचीलेपन के लिए सब्जी फसलों के प्रजनन पर 21 दिवसीय उन्नत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का समापन हो गया। सब्जी विज्ञान विभाग के अंतर्गत बागवानी (सब्जियां) में उन्नत संकाय प्रशिक्षण केंद्र द्वारा आयोजित इस पाठ्यक्रम में देश भर के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने शुष्क भूमि और जल-तनावग्रस्त परिस्थितियों में खेती के तरीकों पर अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पानी जैसे मूल्यवान संसाधन का अच्छी सिंचाई सुविधाओं वाले क्षेत्रों में इसके अत्यधिक उपयोग को रोकने के प्रयासों का आह्वान किया। प्रोफेसर चंदेल ने बदलती जलवायु परिस्थितियों का सामना करने के लिए व्यावसायिक सब्जी फसलों की नई किस्मों को विकसित करने की रणनीतियों पर
चर्चा की।
उन्होंने वैज्ञानिकों से अपने शोध प्रस्तावों में प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को शामिल करने और नई शोध पहलों को डिजाइन करते समय स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र पर विचार करने का आग्रह किया। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्यों द्वारा 27 व्याख्यान दिए गए, जिसमें सब्जी उत्पादन, पौधों की सुरक्षा और बागबानी के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को विवि के फार्मों और प्रयोगशालाओं के साथ-साथ मशरूम अनुसंधान निदेशालय, केंद्रीय आलू अनुसंधान प्रयोगशाला और मशोबरा में विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन और कंडाघाट में कृषि विज्ञान केंद्र सोलन जैसे अनुसंधान संस्थानों का दौरा करने का भी अवसर मिला। कार्यक्रम का समापन प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण के समन्वयक डा. कुलदीप सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।




