गरियाबंद में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी सौतेले पिता को उम्रकैद, 20 हजार रुपये का जुर्माना


गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नाबालिग बेटी के साथ लगातार दुष्कर्म करने के गंभीर मामले में विशेष न्यायालय ने सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी की उम्र 55 वर्ष बताई गई है। फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक जेल में रखने का आदेश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया है।

मां की मौत के बाद सौतेले पिता के साथ रह रही थी पीड़िता

विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी के अनुसार, पीड़िता के जन्म के बाद उसकी मां ने आरोपी से विवाह किया था। मां की मृत्यु करीब दो वर्ष पहले हो गई थी। इसके बाद नाबालिग पीड़िता आरोपी के साथ ही रह रही थी। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ मारपीट और धमकी देकर दुष्कर्म करना शुरू कर दिया।

मामले का खुलासा 10 सितंबर 2025 को हुआ, जब आरोपी के पड़ोसी ने पीड़िता के चचेरे भाई को फोन कर बताया कि आरोपी उसके साथ मारपीट करता है। सूचना मिलते ही परिजन आरोपी के घर पहुंचे। वहां पीड़िता ने अपने साथ हो रही ज्यादती की जानकारी परिजनों को दी। उसने बताया कि उसका सौतेला पिता मारपीट और जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म करता है।

गोंडी और हल्बी भाषा की मदद से दर्ज किए गए बयान

पीड़िता की शिकायत के बाद परिजनों ने थाना अमलीपदर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़िता को आरोपी के घर से थाने लाकर पूछताछ की।

पीड़िता हिंदी भाषा समझने और बोलने में असमर्थ थी। ऐसे में पुलिस ने गोंडी एवं हल्बी भाषा जानने वाली दो महिला अनुवादकों की सहायता से उसके बयान दर्ज किए। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी करीब एक वर्ष से उसके साथ लगातार मारपीट और दुष्कर्म कर रहा था। साथ ही किसी को घटना की जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी देता था।

12 गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। विवेचना पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध साबित करने के लिए कुल 12 गवाहों के बयान कराए। न्यायालय ने पीड़िता के बयान, अन्य गवाहों की गवाही, उम्र निर्धारित करने के लिए कराई गई रेडियोलॉजिकल जांच और चिकित्सा रिपोर्ट सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया।

शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक जेल में रहेगा आरोपी

सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत उसे उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 20 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया।

इस फैसले के साथ न्यायालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध और उनके संरक्षक की ओर से किए गए गंभीर अपराधों को कानून बेहद गंभीरता से लेता है।

रिपोर्ट: गिरिश गुप्ता, गरियाबंद


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