रोहतक का पार्किंग संकट लोकभवन तक पहुंचा
बत्रा ने कहा, “एक वकील होने के नाते, मैं अदालत परिसर और उसके आसपास पार्किंग की समस्या से अच्छी तरह वाकिफ हूं। हर दिन, बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं, वादियों और आम नागरिकों को अपने वाहन पार्क करने के लिए जगह खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। वाहनों की लंबी कतारें, ट्रैफिक जाम, लगातार हॉर्न और वाहनों के उत्सर्जन के कारण काफी असुविधा हो रही है। इस स्थिति के परिणामस्वरूप समय और ईंधन की बर्बादी होती है, साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।”
उन्होंने मांग की कि अदालत परिसर के पास स्थित उपायुक्त के वर्तमान आवास को ऑफिसर्स कॉलोनी में स्थानांतरित कर दिया जाए। उन्होंने कहा, “इससे पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए 2.5 एकड़ से अधिक भूमि खाली हो जाएगी। साइट पर एक आधुनिक और व्यवस्थित पार्किंग सुविधा विकसित की जानी चाहिए, जबकि आवश्यकता के आधार पर मल्टी-लेवल पार्किंग की व्यवहार्यता का भी पता लगाया जाना चाहिए। इससे अदालत परिसर और उसके आसपास यातायात की भीड़, शोर और प्रदूषण से बहुत जरूरी राहत मिलेगी।”
ज्ञापन में मॉडल टाउन, मेडिकल मोड़, पावर हाउस चौक, अशोक चौक और शीला बाईपास सहित प्रमुख सड़कों और चौराहों पर यातायात की भीड़ पर भी प्रकाश डाला गया। अन्य मांगों में वायु और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय, बाजारों में पुलिस सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और त्योहारों के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति शामिल है। त्योहारी सीज़न के मद्देनजर, प्रतिनिधिमंडल ने विक्रेताओं के लिए संगठित वेंडिंग जोन, एम्बुलेंस की निर्बाध आवाजाही, वैकल्पिक यातायात मार्ग, स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वच्छता और पर्याप्त सड़क प्रकाश व्यवस्था की आवश्यकता भी उठाई।
बत्रा ने नागरिक मुद्दों के समाधान के लिए जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त उच्च स्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए विशिष्ट समयसीमा तय करने का आह्वान किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यापारियों और निवासियों को केवल आश्वासन के बजाय ठोस राहत मिले।
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