17 साल छोटे युवक से लिव-इन में रही महिला

बिलासपुर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आपसी संबंधों और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से नजदीकियां बढ़ना और लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपने आप में किसी को आपराधिक जिम्मेदारी के दायरे में लाने का आधार नहीं हो सकता। इसी टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने अपने से 17 साल छोटे युवक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाने वाली महिला की अपील खारिज कर दी है।
मामला चांपा क्षेत्र का है, जहां एक विधवा महिला की वर्ष 2021 में जमीन पर बोरिंग कराने के काम के दौरान युवक से मुलाकात हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और नजदीकियां हो गईं। महिला ने आरोप लगाया था कि युवक ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, इस दौरान वह गर्भवती हुई और युवक के दबाव में गर्भपात की गोलियां भी लीं। बाद में शादी से इनकार करने और मारपीट का आरोप लगाते हुए महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर युवक को दोषमुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ महिला ने हाई कोर्ट में अपील की। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिला पढ़ी-लिखी थी और अपने हितों को समझने में सक्षम थी। वहीं मारपीट और जबरन गर्भपात कराने के आरोप भी प्रमाणित नहीं हो सके। अदालत ने कहा कि अपराध के आवश्यक तत्व साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने युवक की दोषमुक्ति बरकरार रखते हुए महिला की अपील खारिज कर दी।

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