18 दिसंबर को मद्य निषेध दिवस का आयोजन

निषेध के पक्ष में कार्यक्रम आयोजित कराने। रेडियों एवं दूरदर्शन से नशामुक्ति कार्यक्रमों का प्रसारण। जिले के समस्त विभागों के समन्वय से नशापान के विरूद्ध समुचित कार्यवाही। यथा संभव नशा पीड़ितों से प्रत्यक्ष संवाद विकसित किया जाकर उन्हें नशापान के दुष्परिणामों की जानकारी देने। नशामुक्ति साहित्यों का वितरण। सोशल मीडिया में प्रेरक स्लोगन, चित्रों आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार।
भ्रमित हो जाता है। नशापान से शारीरिक एवं मानसिक गंभीर व्याधियां होती हैं। नशापान से सामाजिक प्रतिष्ठा कम होती है तथा समाज से प्रायः उपेक्षा मिलती है। नशापान से पारिवारिक सुख एवं समृद्धि का अंत होता है, जिससे जीवन में भटकाव की स्थिति बनती है। नशापान से वातावरण प्रदूषित होता है, जिससे हमारे परिवार के बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं। नशापान उच्च स्तरीय जीवन शैली का प्रतीक नहीं है। अतएव मैं संकल्प लेता/लेती हूँ कि अपने छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने, अपने परिवार में हर्षाेल्लास रखने, तन, मन, धन को सुदृढ़ बनाने, पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए सभी वर्ग के व्यक्तियों में नशापान के दुष्परिणामों को प्रचारित कर उन्हें नशामुक्ति के लिए प्रेरित करूंगा/करूंगी।




