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हर उम्र के लिए खतरा बनती तेज़ आवाज़, Bihar की घटना बनी चेतावनी


Loud sound तेज आवाज: के खतरे से आमजन अंजान हैं। प्रशासन सख्त कानूनों को लागू कराने की ओर से उदासीन है। बिहार के शिवहर में 14 वर्षीय किशोरी पिंकी कुमारी इसी तेज ध्वनि से बेहोश हुई और इलाज में लापरवाही के चलते मौत हो गई। किशोरों-बच्चों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
जागरण संवाददाता, पटना। शादी, पार्टी या जुलूस, डीजे की तेज धुन, सबका जरूरी हिस्सा मानी जाने लगी है। कांच को दरकाने वाली इस तेज आवाज के खतरे से आमजन अंजान हैं तो प्रशासन सख्त कानूनों को लागू कराने की ओर से उदासीन। नतीजा, डीजे की तेज आवाज न सिर्फ सुनने की क्षमता प्रभावित कर रही है, बल्कि हृदय व बीपी रोगियों की जान पर भी भारी पड़ रही है।
तेज ध्वनि से बेहोश हुई, फिर चली गई जान
शिवहर में 14 वर्षीय किशोरी पिंकी कुमारी इसी तेज ध्वनि से बेहोश हुई और इलाज में लापरवाही के चलते मौत हो गई। देश व प्रदेश में हाल के वर्षों में कान संबंधी रोगियों की संख्या करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। इसका बड़ा कारण डीजे की तेज आवाज है।
किशोरों-बच्चों को होता है अधिक खतरा
ईएनटी विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों-बच्चों जिनके श्रवण अंग व तंत्रिका तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं, उनके कानों में लगातार सीटी जैसी आवाज व सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लास के मामले बढ़े हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 85 डेसिबल से अधिक आवाज यदि लगातार सुनी जाए तो यह श्रवण शक्ति को स्थायी नुकसान होता है। वहीं, डीजे की तेज आवाज 100 से 120 डेसिबल तक की होती है।
तेज ध्वनि दिल, दिमाग व कान को करती प्रभावित

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