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खड़गे ने जाति जनगणना की मांग दोहराई, PM Modi पर साधा निशाना


नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को देशव्यापी जाति-आधारित जनगणना और आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा हटाने की पार्टी की मांग दोहराई । उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला और उन पर पिछड़े समुदायों को अधिकार न देने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ओबीसी के ‘भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में बोलते हुए खड़गे ने कहा, “मुझे खुशी है कि बड़ी संख्या में लोग यहां एकत्र हुए हैं और वे अपने अधिकारों को समझते हैं। देश में जाति आधारित जनगणना कराना और 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को समाप्त करना हमारी मांग है। नरेंद्र मोदी शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आरक्षण नहीं देना चाहते हैं , लेकिन हम उनके साथ खड़े हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ओबीसी समुदाय की आवाज तभी सुनी जाएगी जब वे सत्ता में आएंगे।
उन्होंने कहा, “हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा क्योंकि उन्हें मांगने से भी हमें कुछ नहीं मिलेगा। कभी हमें संघर्ष करना पड़ता है, कभी हमें ताकत दिखानी पड़ती है, और चुनावों के दौरान हमें ऐसे व्यक्ति को चुनना होता है जो अपने सिद्धांतों पर अडिग हो। ओबीसी की आवाज़ तभी सुनी जाएगी जब ओबीसी लोग निर्वाचित पदों पर होंगे।”
खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक लाभ के लिए अपनी ओबीसी पहचान का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और दावा किया कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही अपने समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल कराया था।
खड़गे ने कहा, “मोदी जी खुद को ओबीसी कहते हैं; वह पहले ऊंची जाति में थे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल करवा लिया। फिर उन्होंने अपनी चालाकी शुरू कर दी और ओबीसी लोगों के बीच कहा, ‘भाइयों और बहनों, मैं पिछड़े वर्ग से हूं, मुझ पर अत्याचार हो रहा है।’ लेकिन.. अब वह सभी पर अत्याचार कर रहे हैं और यह अब नहीं चलेगा।”
खड़गे ने पीएम मोदी पर जनता से बार-बार झूठ बोलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ” नरेंद्र मोदी झूठों के सरदार हैं। झूठ बोलना ही उनका काम है। उन्होंने देश से झूठ बोला, कहा कि मैं हर साल युवाओं को 2 करोड़ नौकरियाँ दूँगा, विदेश से काला धन वापस लाऊँगा, सभी को 15-15 लाख रुपये दूँगा, किसानों को एमएसपी दूँगा और पिछड़े वर्ग की आय बढ़ाऊँगा। वह संसद में भी झूठ बोलते हैं। इसलिए हमें लोगों को समझाना चाहिए कि नरेंद्र मोदी देश को गुमराह कर रहे हैं और झूठ बोलने वाला प्रधानमंत्री देश और समाज का भला नहीं कर सकता।”
उन्होंने जाति जनगणना की मांग में “साहस” दिखाने के लिए राहुल गांधी की प्रशंसा की और लोगों से उनका समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए कड़े कदम नहीं उठाए हैं, लेकिन राहुल गांधी पिछड़ों और वंचितों के साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा, “आरएसएस-भाजपा के लोग जहर फैलाते हैं। वे लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ बांटने का काम करते हैं, लेकिन हमें एकजुट रहना चाहिए। हमें हिम्मत के साथ कांग्रेस पार्टी का साथ देना चाहिए। जिस तरह आजादी के समय लोग एकजुट होकर खड़े हुए थे, अगर आप सभी इसी तरह हमारा साथ देंगे तो कांग्रेस पार्टी को कोई हिला नहीं सकता। ओबीसी जाति जनगणना होनी चाहिए, यह हिम्मत केवल राहुल गांधी जी ने दिखाई है। इसलिए हम सभी को राहुल गांधी का साथ देना चाहिए। राहुल गांधी जी पिछड़ों और वंचितों के साथ खड़े हैं, उनका समर्थन करते हैं और उनके अधिकारों के लिए लड़ते हैं, इसलिए आपको उनका साथ जरूर देना चाहिए। मोदी सरकार ने एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।”
‘भागीदारी न्याय सम्मेलन’ का उद्घाटन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा किया गया तथा समापन भाषण कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा दिया जाएगा।
इस अवसर पर बोलते हुए, राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि यूपीए सरकार के दौरान जाति जनगणना न कराना एक भूल थी और अब वह इसे सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले ओबीसी समुदाय के मुद्दों को समझने में विफल रहे, जबकि दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के मुद्दों पर कांग्रेस ने सराहनीय काम किया था।
उन्होंने कहा, “मैं अपने काम के बारे में सोचता हूँ, कहाँ मैंने अच्छा किया और कहाँ कमज़ोर रहा, और मुझे दो-तीन चीज़ें नज़र आती हैं। भूमि अधिग्रहण विधेयक, मनरेगा, भोजन का अधिकार, जनजातीय विधेयक और नियमगिरि संघर्ष – ये सभी काम मैंने अच्छे से किए। जहाँ तक आदिवासियों, दलितों और महिलाओं के मुद्दों का सवाल है, मुझे वहाँ अच्छे अंक मिलने चाहिए। मैंने अच्छा काम किया।”
उन्होंने कहा, ” कांग्रेस पार्टी और मेरे काम में एक कमी रह गई , मैंने ओबीसी समुदाय की उस तरह रक्षा नहीं की जैसी मुझे करनी चाहिए थी। इसकी वजह यह है कि मैं उस समय ओबीसी मुद्दों को गहराई से नहीं समझ पाया था। दस-पंद्रह साल पहले, मैंने दलितों की मुश्किलों को समझा था। उनके मुद्दे दिखाई देते हैं, उन्हें आसानी से समझा जा सकता है, लेकिन ओबीसी की समस्याएं छिपी रहती हैं। अगर मुझे उस समय आपके मुद्दों और समस्याओं के बारे में पता होता, तो मैं उसी समय जाति आधारित जनगणना करा लेता। वह मेरी गलती थी, जिसे मैं सुधारने जा रहा हूं।” उन्होंने आगे कहा कि एक तरह से, यह अच्छा है कि ऐसा हुआ, क्योंकि अगर मैंने उस समय जाति आधारित जनगणना कराई होती, तो आज जैसी स्थिति नहीं होती।
उन्होंने कहा कि दलित, पिछड़े वर्ग, आदिवासी और अल्पसंख्यक देश की 90 प्रतिशत आबादी का गठन करते हैं, फिर भी उन्हें केंद्रीय बजट सहित प्रमुख निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से बाहर रखा जाता है।
उन्होंने कहा, “देश में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों की आबादी मिलाकर लगभग 90 प्रतिशत है। लेकिन बजट तैयार होने के बाद जब हलवा बांटा जा रहा था, तो इस 90 प्रतिशत आबादी में से कोई भी मौजूद नहीं था। देश की 90 प्रतिशत आबादी उत्पादक शक्ति है। आप हलवा बना रहे हैं, लेकिन वे इसे खा रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि उन्हें हलवा नहीं खाना चाहिए, लेकिन कम से कम आपको भी तो मिलना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे जाति-आधारित जनगणना कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इससे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह तो बस पहला कदम है। उनका बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में लोगों के काम को सम्मान मिले और समान भागीदारी मिले।
उन्होंने आगे कहा, “आपको मेरी बहन प्रियंका से पूछना चाहिए कि अगर राहुल किसी काम के लिए मन बना लेते हैं, तो क्या वह उसे छोड़ेंगे या नहीं? मैं छोड़ने वाला नहीं हूँ। जाति आधारित जनगणना तो बस पहला कदम है; मेरा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आपके काम को भारत में सम्मान और भागीदारी मिले।”

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