शीतकालीन गश्त से पहले रेलवे ट्रैक में अव्यवस्थाएं उजागर

सिंह ने कहा कि कई जगहों पर मानवयुक्त समपार फाटकों में कर्मचारियों को 12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है, जो सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि ऐसे सभी फाटकों पर 8 घंटे की ड्यूटी सुनिश्चित की जाए ताकि कर्मचारी मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रह सकें। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि वेल्डिंग यूनिट और ट्रैकमेंटेनरों को कार्य पूर्ण होने के बाद पर्याप्त विश्राम दिए बिना रात की ड्यूटी पर भेजा जा रहा है। ऐसे में न तो कर्मचारियों को आराम मिल पा रहा है और न ही कार्य की गुणवत्ता बनी रह रही है। अनिल कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को दूसरी ड्यूटी बुक करने से पहले कम से कम 10 घंटे का विश्राम दिया जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी कर्मचारी को एक ही दिन में दोबारा कार्य के लिए बुलाया जाता है, तो उसे अन्य विभागों की तरह समयोपरि भत्ता (ओवरटाइम अलाउंस) दिया जाए। सिंह ने स्पष्ट कहा कि रेलवे की सुरक्षा और ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए यह कदम जरूरी है। इसके अलावा संघ ने मांग की कि शीतकालीन गश्त के दौरान इंजीनियरिंग विभाग के चाबीदारों के साथ एक सह-चाबीदार की नियमित नियुक्ति की जाए। यह व्यवस्था ट्रैक निरीक्षण और मेंटेनेंस कार्य को अधिक सुरक्षित बनाएगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, इंजीनियरिंग विभाग की टीमों ने हाल ही में किए गए निरीक्षण में पाया था कि कुछ स्थानों पर सिग्नल और ट्रैक के बीच समन्वय में कमी, ड्रेन सफाई में लापरवाही और लाइन निरीक्षण रजिस्टरों में गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसी को देखते हुए संघ ने समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है, ताकि निर्दोष यात्रियों की यात्रा सुरक्षित और निर्बाध हो सके।
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