UP: श्रावस्ती में जगंली जहरीला पदार्थ खाने से 30 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 10 मासूमों की हालत नाजुक, अस्पताल में मचा कोहराम

UP: श्रावस्ती में जगंली जहरीला पदार्थ खाने से 30 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, 10 मासूमों की हालत नाजुक, अस्पताल में मचा कोहराम

(Photo : AI)

श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती से एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाएगा. यहां के केवलपुर गांव में एक साथ 30 मासूम बच्चे एक जहरीली जंगली चीज खाकर अस्पताल पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से 10 बच्चों की हालत बहुत गंभीर बनी हुई है और उनकी जान पर बन आई है.

क्या है पूरा मामला?

यह दिल दुखाने वाली घटना भिनगा कोतवाली इलाके के केवलपुर गांव की है. कल (शुक्रवार) को गाँव के करीब 30 बच्चे, जिनकी उम्र 5 से 10 साल के बीच होगी, पास के खेतों और जंगल में लकड़ी बीनने गए थे. ये सभी बच्चे बहुत गरीब परिवारों से हैं, जो अक्सर जंगल से लकड़ी या दूसरी चीजें इकट्ठा करते हैं.

घूमते-घूमते जब बच्चों को तेज भूख लगी, तो उन्हें वहीं पर कोई जंगली चीज (फल या पत्ती) दिखी. मासूमों ने भूख मिटाने के लिए उसे तोड़कर खा लिया. उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिसे वो पेट भरने का जरिया समझ रहे हैं, वो असल में जानलेवा जहर है.

खाने के बाद बिगड़ी तबीयत

जहरीली चीज खाने के कुछ ही देर बाद, एक-एक करके सबकी तबीयत बिगड़ने लगी. बच्चों को अचानक तेज उल्टी, दस्त और पेट में भयंकर दर्द शुरू हो गया. जब बच्चे रोते-बिलखते घर पहुँचे, तो उनकी हालत देखकर परिवार वालों के हाथ-पांव फूल गए.

गांव में हड़कंप मच गया. घबराए हुए मां-बाप और गांव वाले तुरंत सभी 30 बच्चों को लेकर जिला अस्पताल की तरफ भागे.

20 ठीक, लेकिन 10 की हालत नाजुक

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन सभी बच्चों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर लिया. डॉक्टरों की पूरी टीम तुरंत इलाज में जुट गई.

अच्छी खबर यह है कि इलाज के बाद 20 बच्चों की हालत स्थिर हो गई है और वे अब खतरे से बाहर हैं. लेकिन 10 बच्चों की हालत अभी भी बहुत ज्यादा नाजुक (क्रिटिकल) बनी हुई है. डॉक्टर उन्हें बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं. अस्पताल में इन बच्चों के माँ-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, वे बस अपने बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे हैं.

इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है. पूरे इलाके में अलर्ट जारी किया गया है और गांव-गांव जाकर लोगों को समझाया जा रहा है कि वे खुद या खासकर अपने बच्चों को, कोई भी अनजान जंगली चीज बिल्कुल न खाने दें.




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