महासमुंद में 5.71 करोड़ का धान खा गए चूहे !

महासमुंद। CG NEWS : छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, लेकिन यहां सरकारी संग्रहण केंद्रों से ही करोड़ों का धान गायब हो रहा है। कवर्धा जिले के बाद अब महासमुंद जिले में करोड़ों रूपये के धान चूहे खा गये, ये दलील यहां के अधिकारियों की है। महासमुंद जिले के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में खरीफ सत्र 2024-25 के दौरान करोड़ों की शॉर्टेज का मामला सामने आया है। किसानों का पसीना और सरकारी खजाना दोनों पर डाका डाला जा रहा है।

महासमुंद जिले के बागबाहरा धान संग्रहण केंद्र में बड़ा घोटाला सामने आया है। सत्र 2024-25 में समितियों से कुल 12 लाख 63 हजार 644 बोरा यानी 4 लाख 98 हजार 193 क्विंटल 38 किलो धान की आवक हुई। लेकिन संग्रहण केंद्र प्रभारी ने रिकॉर्ड में 18 हजार 433 क्विंटल 15 किलो का शॉर्टेज दिखाया – जिसमें सीपेज का हवाला दिया गया। यह शॉर्टेज औसतन 3.65 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ 71 लाख रुपये बैठती है।

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प्रशासन लाखों रुपये खर्च कर मार्कफेड के जरिए कर्मचारी तैनात करता है, परिवहन-हमाली और सुरक्षा के इंतजाम करता है ताकि धान सुरक्षित रहे। लेकिन प्रभारियों की चालाकी से हर साल करोड़ों का धान गायब हो जाता है। शॉर्टेज के बहाने कीट-पतंगे, चूहे, जानवर और मौसम का हवाला देकर घोटाले को अंजाम दिया जाता है।

गौरतलब है कि खाद्य विभाग की सचिव ने 12 दिसंबर 2025 को सख्त निर्देश जारी किए थे । 1% तक शॉर्टेज पर कारण बताओ नोटिस, 1-2% पर विभागीय जांच और 2% से ज्यादा पर तत्काल निलंबन के साथ FIR और कड़ी कार्रवाई।

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फिर भी बागबाहरा में 3.65% की भारी शॉर्टेज के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रभारी के हौसले बुलंद हैं और अगले सत्र में और बड़ा घोटाला होने का खतरा मंडरा रहा है।”

“किसान मेहनत से धान उगाता है, सरकार एमएसपी पर खरीदती है, लेकिन संग्रहण केंद्रों में ही यह गायब हो जाता है। प्रशासन की लापरवाही या मिलीभगत – सवाल वही हैं।

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