नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने स्टे किया रद्द

Bilaspur. बिलासपुर। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस नरेश चंद्रवंशी की कोर्ट ने ऋषि इंटरप्राइजेस द्वारा दायर स्टे वाले आवेदन को खारिज कर दिया। कोर्ट ने शासन की नई नीति में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं पाई। याचिका में प्लास्टिक की बोतल से स्वास्थ्य पर संभावित नुकसान का उल्लेख किया गया था। हाईकोर्ट ने इस दावे के मद्देनजर शासन से दो सप्ताह के भीतर लिखित जवाब मांगा है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई की जाएगी।

ऋषि इंटरप्राइजेस ने राज्य सरकार की नई आबकारी नीति के खिलाफ याचिका दायर कर इस पॉलिसी पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्लास्टिक की बोतलिंग के कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और इसलिए इस नीति पर रोक लगाई जानी चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार करते हुए प्रारंभिक स्टे को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि शासन की पॉलिसी में किसी भी तरह की कानूनी या प्रक्रिया संबंधी कमी नहीं है। इसके बावजूद, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए कोर्ट ने शासन को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।

इस फैसले से स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार की नई आबकारी नीति कानूनी रूप से मान्य है और फिलहाल उस पर रोक नहीं लगेगी। हालांकि, स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर अगली सुनवाई में अदालत की ओर से अधिक स्पष्टता मिलने की संभावना है। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद अब राज्य सरकार अपनी नई आबकारी नीति को जारी रखने में सक्षम है। वहीं, याचिकाकर्ता के स्वास्थ्य संबंधी दावे को लेकर कोर्ट के निर्देशानुसार शासन द्वारा जवाब पेश किया जाएगा, जिसके आधार पर अगली सुनवाई में नीति और याचिका की समीक्षा की जाएगी। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति में प्लास्टिक बॉटलिंग और वितरण व्यवस्था को लेकर नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस नीति के कानूनी ढांचे में कोई दोष नहीं पाया गया।

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