Bandra’s Garib Nagar Slum: मुंबई के बांद्रा गरीब नगर की झुग्गियों को वेस्टर्न रेलवे को मिली तोड़फोड़ की अनुमति, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पात्र निवासियों के लिए रखी बड़ी शर्त

Bandra’s Garib Nagar Slum: मुंबई के बांद्रा गरीब नगर की झुग्गियों को वेस्टर्न रेलवे को मिली तोड़फोड़ की अनुमति, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पात्र निवासियों के लिए रखी बड़ी शर्त

बॉम्बे हाई कोर्ट (Photo credits: Wikipedia)

Bandra’s Garib Nagar Slum:  बॉम्बे हाई कोर्ट ने पश्चिम रेलवे (WR) को बांद्रा (पूर्व) स्थित गरीब नगर में अनधिकृत निर्माणों को हटाने के लिए अपना विध्वंस अभियान जारी रखने की हरी झंडी दे दी है. हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि 2021 के सर्वेक्षणों में पात्र (Eligible) माने गए झुग्गी निवासियों के अधिकारों और उनके घरों की सुरक्षा की जानी चाहिए.

याचिकाकर्ताओं ने लगाया  ये आरोप आरोप

न्यायमूर्ति अजय एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल आर. खाता की पीठ ‘गरीब नगर रहिवासी वेलफेयर संघ सोसाइटी’ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि 18 मार्च के अंतरिम आदेश के बावजूद, अधिकारियों ने उन परिवारों के घर भी तोड़ दिए जिन्हें पुनर्वास के लिए पात्र (PAPs) घोषित किया जा चुका था.  यह भी पढ़े:  MHADA Mumbai lottery 2026: मुंबई में म्हाडा का घर पाने की चाहत रखने वालों को एक और मौका, आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 14 मई तक कर सकेंगे अप्लाई

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए अधिवक्ता राजेश खोब्रागड़े ने तर्क दिया कि अधिकारियों द्वारा इलाके की घेराबंदी करना और निवासियों का सामान हटाना मनमाना और अवैध है. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं.

हाई कोर्ट का संतुलित आदेश

 

29 अप्रैल को दिए गए अपने आदेश में अदालत ने रेलवे को अवैध अतिक्रमण हटाने की अनुमति तो दी, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी जोड़ीं. अदालत ने जोर देकर कहा कि 10 और 11 अगस्त 2021 को मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड, एमएमआरडीए और पश्चिम रेलवे द्वारा किए गए संयुक्त सर्वेक्षण में जो निवासी पात्र पाए गए थे, उनके हितों की रक्षा की जानी चाहिए.

रेलवे की कार्रवाई और निवासियों की परेशानी

याचिका के अनुसार, गरीब नगर क्षेत्र में चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई के कारण उन परिवारों को भारी मानसिक तनाव और विस्थापन का सामना करना पड़ा है, जिन्हें पहले ही पुनर्वास के लिए योग्य घोषित किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी पात्र परिवार को बेघर न किया जाए.

क्या होगा आगे?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को तय की है. तब तक रेलवे को अपनी कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी वैध या पात्र ढांचे को नुकसान न पहुंचे. यह मामला मुंबई में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विस्तार और झुग्गी निवासियों के पुनर्वास के बीच जारी संघर्ष का एक प्रमुख उदाहरण है.






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