नकल पर लगेगी लगाम! UPSC ने लागू किया रियल-टाइम फेस वेरिफिकेशन सिस्टम, जानें कैसे करता है काम

UPSC: नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा एवं भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने के लिए पहली बार फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू किया है। इस नई तकनीक का उद्देश्य फर्जी उम्मीदवारों, नकल और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाना है।

इस प्रणाली के तहत आवेदन के दौरान उम्मीदवार द्वारा अपलोड की गई फोटो का परीक्षा केंद्र पर ली गई लाइव तस्वीर से मिलान किया जाता है। पहचान सत्यापित होने के बाद ही अभ्यर्थी को परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। यूपीएससी के अनुसार, इस बार देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस वेरिफिकेशन की व्यवस्था लागू की गई।

यह तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन (NeGD) के सहयोग से विकसित की गई है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी महंगे उपकरण की आवश्यकता नहीं पड़ी। पर्यवेक्षकों ने अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन के जरिए ही उम्मीदवारों का सत्यापन किया। यूपीएससी ने बताया कि एक उम्मीदवार की पहचान सत्यापित करने में केवल 6 से 8 सेकंड का समय लगा, जिससे परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारों से भी बचाव हुआ। व्यस्त समय के दौरान यह सिस्टम प्रति मिनट लगभग 12,000 प्रमाणीकरण करने में सक्षम रहा। यह परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लगभग 5.5 लाख उम्मीदवारों के लिए विकसित इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू कर परीक्षा की निष्पक्षता को और मजबूत किया गया है।

फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम कैसे काम करता है?


फेस ऑथेंटिकेशन एक डिजिटल पहचान सत्यापन तकनीक है, जिसमें उम्मीदवार द्वारा आवेदन के समय अपलोड की गई फोटो का परीक्षा केंद्र पर ली गई लाइव तस्वीर से मिलान किया जाता है। परीक्षा केंद्र पर पर्यवेक्षक मोबाइल ऐप के जरिए उम्मीदवार की तस्वीर कैप्चर करते हैं, जिसे सिस्टम कुछ ही सेकंड में डेटाबेस में मौजूद फोटो से मिलाता है। यदि दोनों तस्वीरें मेल खाती हैं, तो उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल जाती है। इस प्रक्रिया से फर्जी अभ्यर्थियों, डमी कैंडिडेट्स और पहचान संबंधी धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलती है।


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