CBI कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी धोखाधड़ी मामले में आठ कर्मियों को दो साल की सजा सुनाई

देहरादून: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 2003 के 55 लाख रुपए के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) घोटाले के मामले में आठ अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, कुल 2.85 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

देहरादून में सीबीआई अदालत ने पूर्व अधिकारियों दीपक कुमार वर्मा (एलडीसी), मदन पाल (मेट), मनी राम (बेलदार), सुरेंद्र कुमार कौशिक (ड्राइवर), कासिम (सेवानिवृत्त बेलदार), सुखपाल सिंह (यूडीसी), छत्तर सिंह (रोलर ड्राइवर) और पालू दास (सहायक कोषाधिकारी, ट्रेजरी हरिद्वार) को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को दो साल के कठोर कारावास और कुल जुर्माने की सजा सुनाई।

यह मामला मूल रूप से 9 अगस्त 2003 को सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था, जो 7 मई 2003 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद दर्ज हुआ था। अदालत ने एक सिविल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का आदेश दिया था।

सीबीआई के अनुसार आरोप 2001 से 2002 के बीच के हैं, जब हरिद्वार के पीडब्ल्यूडी के कुछ अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर जाली और अनधिकृत विभागीय चेक जारी कर तथा भुना कर लगभग 55,10,511 रुपए की सरकारी धनराशि धोखाधड़ी से निकाल ली।

जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने 15 जून 2005 को इस मामले में कुल 12 सरकारी कर्मचारियों और आठ निजी व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। एजेंसी ने बताया कि मुकदमे के दौरान चार आरोपियों रविंद्र श्रीवास्तव, सुखचंद त्यागी, धर्मेंद्र कुमार भटनागर और इलामचन की मृत्यु हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई।

इसके अलावा, सात आरोपियों रेखा नेगी, पूनम वर्मा, प्रतिभा, संजय कुमार, चंद्रावती, राजपाल और रीना श्रीवास्तव ने पहले ही मुकदमे के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था और उन्हें अदालत द्वारा अलग से दोषी ठहराया गया।

मुकदमे के समापन के बाद अदालत ने शेष आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जबकि एक बाहरी व्यक्ति प्रदीप कुमार वर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।


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