Twisha Sharma Case: दहेज मौत मामले में CBI ने पूर्व जज गिरीबाला सिंह को किया गिरफ्तार, जल्द होगी कोर्ट में पेशी

Twisha Sharma Case: दहेज मौत मामले में CBI ने पूर्व जज गिरीबाला सिंह को किया गिरफ्तार, जल्द होगी कोर्ट में पेशी

ट्विशा शर्मा मौत मामला (Photo Credits: File Image)

Twisha Sharma Case: हाई-प्रोफाइल दहेज मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जिला जज गिरीबाला सिंह को भोपाल स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई उनकी बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में की गई है. सीबीआई की टीम भारी पुलिस बल के साथ सुबह कटारा हिल्स स्थित गिरीबाला सिंह के घर पहुंची. इस दौरान स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी. Twisha Sharma Death Case:ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया, भोपाल स्थित आवास पर पूछताछ जारी

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की टीम सुबह करीब 10:30 बजे गिरीबाला सिंह के घर पहुंची और लगभग पांच घंटे तक उनसे पूछताछ की. इसके बाद एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया. बाग सेवनिया पुलिस थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि गिरीबाला सिंह को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया जाएगा और बाद में उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा.

यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद हुई है. ट्विशा शर्मा 12 मई को अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं. उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को गिरीबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी. घटना के दो दिन बाद गिरीबाला सिंह ने भोपाल की सत्र अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी. 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका को किए गए पैसों के ट्रांसफर का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दे दी थी.

हालांकि, हाई कोर्ट के अवकाशकालीन न्यायाधीश देव नारायण मिश्रा ने बुधवार को 17 पन्नों के आदेश में इस जमानत को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों पर सही तरीके से विचार नहीं किया.

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि व्हाट्सएप चैट और ट्विशा के परिवार के बयान यह दर्शाते हैं कि आरोप सिर्फ पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत गंभीर जांच की आवश्यकता है.

ट्विशा के परिवार का आरोप है कि गिरीबाला सिंह और उनके बेटे ने ट्विशा को प्रताड़ित किया और गर्भपात के लिए दबाव बनाया. कोर्ट ने माना कि ट्विशा द्वारा गर्भपात कराना एक स्वीकार्य तथ्य है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगाना बताया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने ट्विशा के शरीर पर छह से सात अतिरिक्त चोटों का भी उल्लेख किया. इनमें हाथ, उंगली और सिर पर चोट के निशान शामिल थे.

बाद में आई क्वेरी रिपोर्ट में साफ किया गया कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं आई थीं. ट्विशा के पिता की ओर से पेश वकील ने अदालत में तर्क दिया कि गिरीबाला सिंह एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी होने के साथ साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी ले चुकी हैं. ऐसे में उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल कर घटनास्थल से छेड़छाड़ की हो सकती है.




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