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केंद्रीय उपक्रमों से प्रोजेक्ट लिए, तो होगा हिमाचल प्रदेश का फायदा


Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में तीन बड़े प्रोजेक्टों को सरकार अपने हाथ में लेती है, तो आने वाले समय में हिमाचल समृद्ध होने की तरफ बड़े कदम बढ़ाएगा। हालांकि अभी सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है और इस संकट से उभरने के लिए सरकार काफी ज्यादा प्रयास कर रही है। केंद्रीय उपक्रमों से प्रोजेक्ट वापस लेने का जो फैसला लिया गया है, वो हिमाचल के भविष्य के लिए है। अब लूहरी, सुन्नी व धौलासिद्ध प्रोजेक्ट सरकार के पास आते हैं और प्रदेश सरकार इनको तैयार करती है, तो यकीनन हिमाचल को समृद्ध बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी, अभी इसमें काफी ज्यादा परेशानी होगी, क्योंकि सरकार के पास पैसा नहीं है और सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड ने करीब 3400 करोड़ रुपए की दावेदारी की है। उनका कहना है कि तीन परियोजनाओं पर अब तक उन्होंने इतना पैसा खर्च कर

दिया है।

यह विकल्प एसजेवीएनएल ने ही सरकार को दे रखा है कि अगर उसे प्रोजेक्ट टेकओवर करने हैं, तो वह इतना पैसा चुकता कर दे। अब सुक्खू सरकार ने दम दिखाया है और पैसा देने को भी सरकार तैयार है, मगर किसी तीसरी एजेंसी से इसका मूल्यांकन करवाया जाएगा कि क्या वाकई इतना पैसा अब तक खर्च हो चुका है या फिर नहीं। वैसे सरकार का अपना दावा है कि सतलुज निगम ने अब तक 1400 करोड़ रुपए के आसपास का खर्चा तीनों परियोजनाओं में किया है, लेकिन इस निगम का दावा कुछ और है। अब मूल्यांकन के बाद ही साफ होगा कि क्या सच्चाई है। इस मामले में सीधे रूप से केंद्र सरकार भी जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार अपने उपक्रमों में जो हिस्सेदारी रखती है, उसके बूते उसको भी अच्छी खासी कमाई हो रही है और लूहरी, सुन्नी व धौलासिद्ध परियोजनाएं इनसे छिन जाने की वजह से केंद्र की कमाई पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में राज्य सरकार के लिए केंद्र सरकार और पेचिदगियां खड़ी कर सकती है।

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