गरियाबंद: सालभर बाद भी नहीं बन सका स्कूल भवन, जर्जर छप्पर के नीचे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर बच्चे

गिरीश गुप्ता गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के बेगरपाल ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम पंडरीपानी में सरकारी स्कूल भवन निर्माण की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। करीब एक साल पहले पुराने स्कूल भवन को तोड़ दिया गया, लेकिन आज तक नया भवन तैयार नहीं हो सका। नतीजतन, प्राथमिक कक्षा के छात्र-छात्राएं जर्जर और अस्थायी छप्पर के नीचे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
नया भवन अधूरा, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार, पुराने भवन को यह कहकर तोड़ दिया गया था कि जल्द ही नया स्कूल भवन बनकर तैयार हो जाएगा। निर्माण कार्य शुरू भी हुआ, लेकिन कुछ समय बाद अचानक बंद हो गया। इसके बाद से निर्माण स्थल पर कोई गतिविधि नजर नहीं आई।
आज स्थिति यह है कि बच्चों को खुले और असुरक्षित स्थान पर पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात के मौसम में छप्पर से पानी टपकता है, जबकि गर्मी में भीषण गर्मी और सर्दी में ठंड के बीच पढ़ाई करना बच्चों की मजबूरी बन गई है।
बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी
स्कूल में पर्याप्त कक्षाओं के अभाव में शिक्षक अस्थायी छप्पर के नीचे कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। बारिश होने पर छप्पर टपकने लगता है और कक्षाएं बाधित हो जाती हैं। कई बार बच्चों को पढ़ाई बीच में ही छोड़कर घर लौटना पड़ता है।
अभिभावकों का कहना है कि वे रोज अपने बच्चों को डर के साथ स्कूल भेजते हैं, क्योंकि जर्जर छप्पर कभी भी गिर सकता है।
ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये शिक्षा पर खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।
निर्माण कार्य बंद होने पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माण एजेंसी ने कुछ समय तक काम किया, फिर अचानक काम बंद कर दिया। निर्माण सामग्री भी लंबे समय से मौके पर पड़ी हुई है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर निर्माण कार्य क्यों रुका और जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इसे पूरा कराने की पहल क्यों नहीं की।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षकों ने मांग की है कि जब तक नया स्कूल भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाए। साथ ही अधूरे भवन का निर्माण जल्द पूरा कर छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब बच्चों को सुरक्षित भवन और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।
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