जीरामजी… मृतक कर रहे मजदूरी! मरने के बाद भी मनरेगा में दर्ज होती रही हाजिरी

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मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की इमलिया ग्राम पंचायत में मनरेगा के रिकॉर्ड को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव के कुछ ऐसे लोगों के नाम से भी मनरेगा में मजदूरी दर्ज होती रही, जिनकी मौत कई साल पहले हो चुकी है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में मृतकों के नाम से जॉब कार्ड वर्षों तक सक्रिय रहे और उनके नाम पर मजदूरी का भुगतान भी रिकॉर्ड में दिखाई देता रहा।
मामले की पड़ताल में सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक इमलिया ग्राम पंचायत में कुछ लोग 15 साल पहले दुनिया छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ की मृत्यु 3 से 4 साल पहले हो चुकी है। इसके बावजूद मई 2026 तक तालाब, सड़क और सीसी रोड जैसे निर्माण कार्यों में उनके नाम की मजदूरी जॉब कार्ड में दर्ज होती रही। इससे मनरेगा की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पड़ताल के दौरान जॉब कार्ड और भुगतान रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद गांव में एक-एक परिवार तक पहुंचकर रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की गई। जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मृत लोगों के जॉब कार्ड लंबे समय तक सक्रिय दिखाई दिए।
बताया गया कि कुछ जॉब कार्ड में संबंधित व्यक्ति की मौत के बाद भी दूसरे नाम जुड़े हुए मिले। परिवारों का दावा है कि रिकॉर्ड में जितनी मजदूरी और भुगतान दिखाया जा रहा है, उन्हें वास्तविक रूप से उसका भुगतान नहीं मिला। एक परिवार ने यह भी बताया कि एक युवती की शादी करीब 10 साल पहले इंदौर में हो चुकी है, लेकिन इमलिया के रिकॉर्ड में उसके नाम से मजदूरी दर्ज दिखाई दे रही है।
एक परिवार का एक ही जॉब कार्ड का नियम
मनरेगा के नियमों के अनुसार एक परिवार के लिए एक ही जॉब कार्ड बनाया जाता है। परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर परिवार में जो व्यक्ति मुखिया बनता है, उसका नाम रिकॉर्ड में अपडेट किया जाना चाहिए। यदि जॉब कार्ड में किसी बाहरी व्यक्ति के नाम से मजदूरी दर्ज की जा रही है तो यह गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है।
इमलिया ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में मृतकों के नाम से जॉब कार्ड सक्रिय रहने और मजदूरी दर्ज होने के मामले सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन रिकॉर्ड को समय-समय पर अपडेट क्यों नहीं किया गया।
मृतकों के नाम से मजदूरी का भुगतान कैसे हुआ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित व्यक्ति की कई साल पहले मौत हो चुकी थी तो उसके नाम से मनरेगा में काम और मजदूरी कैसे दर्ज होती रही? यदि जॉब कार्ड सक्रिय था तो पंचायत स्तर पर इसकी जांच क्यों नहीं हुई? और यदि भुगतान भी हुआ है तो वह राशि किस खाते में गई?
पड़ताल में सामने आए रिकॉर्ड में कुछ मृतकों के नाम के सामने जॉब कार्ड की स्थिति ACTIVE दिखाई गई है। इससे रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
मामला सामने आने के बाद मनरेगा रिकॉर्ड में दर्ज मृत लोगों के नाम और भुगतान की पूरी जांच की मांग उठ रही है। यह भी पता लगाने की जरूरत है कि किन-किन लोगों के नाम से मजदूरी दर्ज हुई, कितनी राशि का भुगतान दिखाया गया और वास्तविक राशि किस खाते में पहुंची।
यदि जांच में रिकॉर्ड में जानबूझकर गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा किए जाने की पुष्टि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसमें पंचायत स्तर के जिम्मेदार कर्मचारियों के साथ अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनके जॉब कार्ड तत्काल निरस्त किए जाने चाहिए या नहीं। इसके साथ ही जिन जॉब कार्ड में मृतकों के नाम से मजदूरी दर्ज हुई है, उनका भौतिक सत्यापन और भुगतान की बैंकिंग जानकारी जांचना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल इमलिया ग्राम पंचायत में सामने आए ये मामले मनरेगा के रिकॉर्ड की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने की लापरवाही है या इसके पीछे सुनियोजित वित्तीय अनियमितता की गई है। जांच के आधार पर ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका और सरकारी राशि के वास्तविक भुगतान की स्थिति सामने आ सकेगी।
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