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तामलुक में लुप्त कठपुतली नृत्य पर कार्यशाला का आयोजन


Medinipur मेदिनीपुर:बचपन का कठपुतली नृत्य अब लुप्त होने की कगार पर है। उस परंपरा के लुप्त स्वरूप को बचाए रखने के लिए पूर्व मेदिनीपुर के तमलू में तीन दिवसीय लोक कला कार्यशाला का आयोजन किया गया। पहली बार जिले के विभिन्न हिस्सों से कलाकारों को कठपुतली नृत्य के इर्द-गिर्द एक मंच पर लाया गया। लोक संस्कृति एवं जनजातीय संस्कृति केंद्र द्वारा आयोजित यह कार्यशाला मंगलवार से गुरुवार तक जिला प्रशासनिक भवन में आयोजित की गई। पूर्व मेदिनीपुर जिला प्रशासन और जिला सूचना एवं संस्कृति विभाग ने मिलकर यह कार्यशाला आयोजित की।
जिले के विभिन्न हिस्सों से आए 50 कलाकारों को कठपुतली कला के तीन प्रकारों – डेंजर पुतुल, तारी पुतुल और बेनी पुतुल – का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इससे पहले पूर्व मेदिनीपुर में बाउल, पटचित्र और भटियाली जैसे विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएँ होती थीं, लेकिन कठपुतली कला अब एक नया विषय बन गया है। इस कार्यशाला में अरविंद घोराई और भरत शीट ने प्रशिक्षण दिया। वे 30 से अधिक वर्षों से इस कला से जुड़े हुए हैं। हालाँकि पहले चरण में 50 लोगों को प्रशिक्षित किया गया था, लेकिन जिला प्रशासन की योजना इस तरह से लगभग 200 लोक कलाकारों को प्रशिक्षण के दायरे में लाने की है।
वर्तमान में, पूर्व मेदिनीपुर में 200 कलाकारों को आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है। इनमें से प्रत्येक को 1,000 टका का मासिक भत्ता मिलता है। ये कलाकार विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मोबाइल झांकियों के माध्यम से जागरूकता फैलाने में लगे हुए हैं। इस कार्यशाला में छह-सात महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाती है। परियोजना अधिकारी मौजूद रहते हैं और लोक कलाकारों को इस माध्यम से आम जनता को जागरूक करने का तरीका सिखाते हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिला सूचना एवं संस्कृति विभाग की अधिकारी महुआ मल्लिक ने बताया कि इन लोक कलाकारों के माध्यम से कन्याश्री, बाल विवाह, कृषक बंधु, मानविक, विधवा भत्ता समेत कई परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही, ये कलाकार निजी स्थलों पर प्रदर्शन करके भी कमाई कर सकेंगे।

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