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नगर पंचायत में महिला अध्यक्ष के देवर पर मकान निर्माण रुकवाने का आरोप

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के छुरा नगर पंचायत में एक विवाद ने राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक महकमे को हिला दिया है। नगर पंचायत की महिला अध्यक्ष लुकेश्वरी निषाद के देवर मानसिंह निषाद पर एक आम नागरिक द्वारा निजी मकान निर्माण कार्य रुकवाने और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता नीरज यदु और उनकी मां सरिता यदु ने नगर पंचायत प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला अब सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप के कारण और भी गरमाता जा रहा है, जिसमें कथित रूप से मानसिंह निषाद नीरज को धमकाते और अधिकारियों को काम रोकने के निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं।
घटना का विवरण
शिकायतकर्ता नीरज यदु का कहना है कि उन्होंने अपने मकान के निर्माण का कार्य शुरू किया था, जिसके बाद 4 अगस्त की सुबह लगभग 11:15 बजे उन्हें मानसिंह निषाद का फोन आया। फोन पर बातचीत के दौरान मानसिंह ने निर्माण की अनुमति और दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की।ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, बातचीत के दौरान मानसिंह ने अपने आसपास मौजूद लोगों से यह कहते हुए सुना गया। “पहले इनका काम बंद कराओ।” नीरज का कहना है कि फोन पर धमकी के कुछ ही घंटों के भीतर, उसी दिन शाम को नगर पंचायत से उन्हें निर्माण कार्य रोकने का नोटिस थमा दिया गया।
शिकायत में क्या कहा गया?
5 अगस्त को सरिता यदु ने नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) यमन देवांगन को एक लिखित शिकायत दी। शिकायत में कहा गया है कि नगर पंचायत में निर्वाचित अध्यक्ष के देवर को कोई अधिकार नहीं है कि वह किसी आम नागरिक को धमकाए या निर्माण कार्य रुकवाने के लिए पंचायत तंत्र का दुरुपयोग करे। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि मानसिंह निषाद स्वयं को अध्यक्ष का प्रतिनिधि बताकर नगर पंचायत के कार्यों में अनाधिकृत हस्तक्षेप करते हैं।
प्रशासन का जवाब
मुख्य नगरपालिका अधिकारी यमन देवांगन ने पुष्टि की है कि उन्हें सरिता यदु की शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा- “मैंने मामले की जांच शुरू कर दी है। संबंधित फाइलें मंगाई गई हैं और आज दोपहर 2 बजे के बाद परिषद की बैठक के उपरांत विस्तृत जानकारी दी जाएगी।” सीएमओ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया गया है, अतः मानसिंह निषाद के हस्तक्षेप की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है।
वायरल ऑडियो से बढ़ा विवाद
जिस ऑडियो क्लिप ने इस पूरे मामले को आग दी है, उसमें स्पष्ट रूप से एक पुरुष आवाज नीरज से बात करते हुए सुनाई देती है, जो कथित रूप से मानसिंह निषाद की बताई जा रही है। उसमें वे कहते हैं- “कहाँ से परमिशन ली है? किस अधिकारी ने अनुमति दी है? और काम रुकवाओ।” ऑडियो में मौजूद कथित आदेश और धमकी भरे लहजे ने न केवल पीड़ित पक्ष को आहत किया है, बल्कि स्थानीय नागरिकों और पार्षदों के बीच भी चिंता की लहर दौड़ा दी है।
राजनीतिक असर और नैतिक सवाल
यह मामला इसलिए और भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि इसमें नगर पंचायत की निर्वाचित महिला अध्यक्ष का निकट संबंधी शामिल है। नैतिक दृष्टि से यह प्रश्न उठ रहा है कि अगर निर्वाचित जनप्रतिनिधि के परिजन बिना किसी अधिकार के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीर अनदेखी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कोई भवन निर्माण नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है, तो उसे रोकने के लिए वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी मौजूद हैं। परंतु किसी व्यक्ति विशेष द्वारा फोन पर धमकी देकर व्यक्तिगत हस्तक्षेप करना गंभीर दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।




