पुरी में रथ निर्माण का दूसरा दिन: पारंपरिक विधि से तीनों रथों की तैयारी तेज

Odisha ओडिशा: पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। बुधवार को रथ निर्माण कार्य के दूसरे दिन सेवायतों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत तीनों रथों के लिए लकड़ी की कटाई और माप का कार्य शुरू किया। इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख मुख्य महाराणा के नेतृत्व में की जा रही है।
रथ निर्माण की शुरुआत निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में की गई। दूसरे दिन सेवायतों ने लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठों को सावधानीपूर्वक नापा और उन्हें आवश्यक आकार में काटा। यह कार्य अत्यंत सटीकता और अनुभव की मांग करता है, क्योंकि रथों का निर्माण पूरी तरह पारंपरिक तकनीकों के आधार पर किया जाता है।
तीनों रथ—भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए बनाए जाते हैं। हर रथ की संरचना, आकार और डिजाइन अलग-अलग होता है, जिसे सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार ही तैयार किया जाता है। सेवायतों और कारीगरों की टीम इस कार्य में पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ जुटी हुई है। रथ निर्माण के दौरान किसी आधुनिक मशीन का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि पारंपरिक औजारों से ही सभी काम किए जाते हैं। यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाती है।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होते हैं। ऐसे में रथ निर्माण का हर चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रशासन भी इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है। रथ निर्माण का यह कार्य आने वाले दिनों में और तेजी पकड़ेगा, ताकि निर्धारित समय पर भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जा सके।
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