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प्रदेश में ढाई साल में 5000 से अधिक NDPS मामले दर्ज


Shimla. शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ जन मुहिम छेड़ी गई है। युवा शक्ति को नशे की बुराई से बचाने और प्रदेश में व्याप्त ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए राज्य सरकार बहुआयामी रणनीति के तहत कार्य कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में सिन्थेटिक ड्रग्स के मामले सामने आएं हैं। फार्मास्युटिकल हब के नज़दीक क्षेत्रों में इस तरह के मामले अधिक दर्ज किए जा रहे हैं। इस खतरे से निपटने के लिए सरकार तत्परता के साथ कार्य कर रही है। फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए जांच एवं निगरानी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।
प्रदेश सरकार ने दो महत्वपूर्ण कानून बनाकर अपने कानूनी ढांचे को और मजबूत किया है। हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक, 2025 और हिमाचल प्रदेश ड्रग्स और नियंत्रित पदार्थ (रोकथाम, नशामुक्ति और पुनर्वास) विधेयक, 2025 के तहत नशे में संलिप्त लोगों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक में मृत्युदंड, आजीवन कारावास, भारी जुर्माना और संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं। दूसरे विधेयक में अवैध नशीली दवाओं के व्यापार के लिए सख्त सजा सुनिश्चित की गई है। प्रदेश सरकार ने सिक्किम मॉडल से प्रेरित होकर नशामुक्ति, पुनर्वास, निवारक शिक्षा और आजीविका सहायता के लिए एक राज्य कोष बनाया गया है।

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