मेडिकल खरीद घोटाला: ACB ने कोर्ट में दाखिल की 12 हजार पन्नों की चार्जशीट
चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराए और 13(1)(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 316(5), 318(4) और 238 के तहत भी आरोप शामिल किए गए हैं। यह मामला दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न खरीद प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, बेडशीट और लिनन सामग्री, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरणों, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओआरएस, सर्जिकल सामान, दवाइयों और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित रूप से व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां की गईं।
शिकायत में कहा गया था कि निविदा (टेंडर) की शर्तों और तकनीकी मानकों में कथित हेरफेर कर कुछ विशेष कंपनियों और सप्लायर्स को फायदा पहुंचाया गया। साथ ही वास्तविक प्रतिस्पर्धियों को प्रक्रिया से बाहर रखने के आरोप भी लगाए गए थे। इस मामले में एसीबी ने 2 जून को एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जून में तत्कालीन डीजीएचएस वत्सला अग्रवाल और डीजीएचएस की केंद्रीय खरीद एजेंसी के तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया था।
एसीबी का कहना था कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर खरीद प्रक्रिया, टेंडर शर्तों और तकनीकी विनिर्देशों में कथित हेरफेर किया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचा। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ और जांच के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अब राउज एवेन्यू कोर्ट में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की गई है। एसीबी का दावा है कि जांच के दौरान खरीद प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई, जिसके बाद आरोपियों की भूमिका सामने आई।
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