रामानुजगंज का 14 वर्षीय दिव्य कुमार जोशी: पढ़ाई के साथ मोमोज ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा छात्र

दिव्य ने अपने करियर की शुरुआत चाचा के मोमोज ठेले पर मदद करने से की। जब वह केवल नौ वर्ष के थे, उन्होंने गांधी चौक के पास अपने चाचा के ठेले पर हाथ बंटाना शुरू किया। पिछले तीन वर्षों से दिव्य अपना स्वयं का ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। दिव्य के साथ उनके नौ वर्षीय छोटे भाई राजकुमार जोशी भी ठेले के काम में मदद करते हैं। दोनों भाई रोज़ रात 8 बजे दुकान बंद करने के बाद ठेले को घर तक पहुंचाते हैं और बर्तन साफ करने के बाद ही घर लौटते हैं। दिव्य के मोमोज इतने लोकप्रिय हैं कि ग्राहक उनकी दुकान का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
दिव्य बताते हैं कि उनकी दैनिक बिक्री 800 से 1400 रुपये तक होती है। उनका दिन सुबह 6:30 बजे सैर के साथ शुरू होता है, उसके बाद पढ़ाई और स्कूल की तैयारी होती है। स्कूल से शाम 4 बजे लौटने के बाद वह जल्दी खाना खाकर ठेले के लिए निकल पड़ते हैं। उनकी दिनचर्या पढ़ाई और काम के संतुलन का एक उदाहरण है। दिव्य वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामानुजगंज में पढ़ाई कर रहे हैं। पढ़ाई में उनकी मेहनत भी उनकी मेहनती जीवनशैली की तरह प्रशंसनीय है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के साथ-साथ अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वह कभी हार नहीं मानते।
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