सनातन धर्म प्रतीकों की शक्तिशाली रक्षक थीं महारानी अहिल्या बाई होलकर: किरण सिंहदेव

महिला सम्मान समारोह
और मंडल अध्यक्षों का सम्मान समारोह आयोजन किया गया आयोजित कार्यक्रम में विशेष रूप से विधायक गण , आयोग अध्यक्ष और प्रदेश भाजपा और शहर जिला के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में रायपुर शहर जिला के कार्यकर्ता उपस्थित थे उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव उपस्थित थे उन्होंने सर्वप्रथम रायपुर शहर की सम्मानित महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को शॉल श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया उन्होंने कार्यकताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने उपस्थित विभिन्न समाज वर्ग की सम्मानित महिलाओं को सम्मानित करते हुए कहा आपको सम्मानित करते हुए हम सभी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं ।हमने लोकमाता अहिल्या बाई होलकर की त्रिशताब्दी जयंती पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जिसमें संगोष्ठी, चित्रकला, रंगोली जैसे कार्यक्रम किए गए। उन्होंने आगे कहा इस कार्यक्रम की आवश्यकता क्यों पड़ी यह भी जानना आवश्यक है इसका मूल कारण समाज में अपना बहुमूल्य योगदान दें रही है सरकारी, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों में हमारी नारीशक्ति ने स्वयं को अपने परिवार को और साथ ही साथ देश को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान हमारी मातृशक्ति का रहा है और हम इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से उनका गाहे बगाहे सम्मान करते हैं ।हमारा देश मातृशक्ति का देश है पूरे विश्व में केवल हमारा देश है जिसे माता का दर्जा दिया जाता है। सत्रहवीं शताब्दी में लोकमाता अहिल्या बाई होलकर का जन्म सामान्य गरड़िया परिवार में हुआ और विवाह राज परिवार में हुआ अल्प आयु में उनके वर देवलोक गमन कर गए उसके पश्चात उन्होंने 26 वर्ष का शासन किया और अपने शासन में जनता के विकास पर प्रमुखता से कार्य किया जिसमें धार्मिक पुनरुद्धार , सामाजिक पुनरुद्धार प्रमुखता से है और यदि आप देखेंगे तो आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे प्रेरित होकर अपने कार्यकाल का निर्वहन किया और अपनी योजनाओं में उनकी प्रेरणा को प्रमुखता से रखा।
हमारा दुर्भाग्य है कि कुछ ताकतों ने अपने राजनीतिक उद्धार के लिए भारत भूमि की पुण्य आत्माओं को उनके योगदान को लगभग धूमिल करने दबाने का प्रयास किया और हमारी युवा पीढ़ी को अपने असली इतिहास से अनभिज्ञ रखा गया। धर्म के क्षेत्र में लोकमाता अहिल्या बाई होलकर का योगदान अविस्मरणीय है हिमालय से लेकर कन्या कुमारी तक उन्होंने लगभग 130 मंदिरों का पुनरुद्धार का बीड़ा उठाकर उसे पूर्ण किया और सनातन धर्म के प्रतीकों की पुर्नस्थापना की और यह उस समय की बात है जब आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता नहीं थी लेकिन लक्ष्य निर्धारित था और मन में दृण निश्चय सामाजिक कुरीतियों को समाज से निकलने में उनकी भूमिका अदभुत और अविस्मरणीय है। समाज को शिक्षित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यदि उनके जीवन को पूर्ण रूप से संक्षिप्त में बताना हो तो न्यायपूर्ण राज्य का सर्वोत्तम उदाहरण पुण्य श्लोका लोकमाता अहिल्या बाई होलकर जी का शासन काल रहा है न्याय पूर्ण कहना इसलिए भी आवश्यक है कि उन्होंने न्याय के लिए अपने परिवार को भी जनमानस की तरह ही न्याय करा दण्डित भी किया।
जन्म जयंती
पर आयोजित कार्यक्रम केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं अपितु भारत में सांस्कृतिक , धार्मिक और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली पुण्य आत्माओं का पुण्य स्मरण रूपी हव्य है पुण्यश्लोका महारानी अहिल्या बाई होलकर का सनातन धर्म के प्रतीकों के संरक्षण में और साथ ही साथ सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान रहा उन्होंने भारत के अधिकाधिक ज्योतिर्लिंगों जीर्णोद्धार करने में अपना योगदान दिया अपने शासन के दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय को विशेष स्थान दिया साथ ही प्रजा की व्यवस्थाओं के प्रति वचनबद्ध होकर कार्य को प्रमुखता से स्थान दिया रानी अहिल्या बाई के 26 वर्ष के कार्यकाल के दौरान कभी उन्होंने अकाल और भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी सांस्कृतिक , धार्मिक और सामाजिक सुधारों और सनातन के पुण्य प्रतीकों को पुनः स्थापित करने में उनके योगदान को भारत वर्ष युगों युगों तक याद करेगा ।Source link




