साइबर धोखाधड़ी में 17 बैंक खातों पर शिकंजा, 6.42 लाख की राशि जब्त

Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में साइबर अपराध से जुड़ा एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा संचालित “समन्वय पोर्टल” से प्राप्त जानकारी के आधार पर रायपुर पुलिस ने साउथ इंडियन बैंक की शाखा में संचालित 17 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की है। इन खातों के जरिए 6,42,477 रुपये की संदिग्ध राशि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त होकर जमा की गई थी।

समन्वय पोर्टल से खुलासा

पुलिस के अनुसार, “समन्वय पोर्टल” साइबर अपराध से संबंधित जानकारियां साझा करने और अनुसंधान में सहयोग के लिए बनाया गया है। इसी पोर्टल के माध्यम से जानकारी मिली कि रायपुर स्थित South Indian Bank शाखा में कई खाते साइबर ठगी के पैसों के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आजाद चौक थाना रायपुर में अपराध दर्ज किया गया है। अपराध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4), 317(5), 111, 3(5) के तहत मामला कायम कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

खाता धारकों की भूमिका संदिग्ध

जांच में सामने आया कि खाता धारक, संवर्धक और मोबाइल नंबर धारक आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने जानबूझकर अपने खातों का उपयोग ठगी से प्राप्त धन राशि जमा करने और खर्च करने के लिए किया। यह राशि 01 जनवरी 2024 से 30 जून 2025 के बीच अलग-अलग खातों में जमा की गई। पुलिस ने खुलासा किया कि South Indian Bank की रायपुर शाखा में कम से कम 17 खातों का उपयोग धोखाधड़ी के पैसों के लिए किया गया। इन खातों से बार-बार लेन-देन किया गया और ठगी की रकम आगे संवर्धित की गई।

साइबर क्राइम पोर्टल में दर्ज शिकायतें

इन खातों से जुड़ी धोखाधड़ी की रिपोर्ट साइबर क्राइम पोर्टल में दर्ज हुई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनसे ऑनलाइन ठगी करके रकम इन खातों में डाली गई, जिसे बाद में आरोपी या उनके सहयोगियों ने निकाला और आगे उपयोग में लाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी संदिग्ध खातों की विस्तृत जांच की जा रही है। खाता धारकों से पूछताछ की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि वे सीधे तौर पर गिरोह से जुड़े हैं या महज म्यूल अकाउंट धारक (अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए गए खाते) के रूप में काम कर रहे थे।

बैंक और मोबाइल नंबरों की जांच

पुलिस अब बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों और लेन-देन के डिजिटल सबूत जुटा रही है। जिन नंबरों का इस्तेमाल धोखाधड़ी में हुआ, उनकी कॉल डिटेल और लोकेशन का भी विश्लेषण किया जा रहा है। रायपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर धोखाधड़ी से जुड़ा कोई भी खाता धारक कानून की गिरफ्त से बाहर नहीं रहेगा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ठगी के पैसों को अपने खाते में रखता है, तो वह कानूनी रूप से अपराधी माना जाएगा।

बढ़ती साइबर ठगी और जागरूकता

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन ठगी के मामलों में म्यूल अकाउंट्स की भूमिका अहम होती है। ठग अक्सर भोले-भाले या पैसों के लालच में फंसने वाले लोगों के खाते इस्तेमाल करते हैं। इसलिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए कि वे किसी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति के लिए अपने खाते का इस्तेमाल न होने दें।

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