250 KM का सफर, वेंटिलेटर और CPR… मौत से

बिलासपुर। CG NEWS : एक ऐसा जीव, जिसे देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, आज खुद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। अंबिकापुर में रेस्क्यू के दौरान गंभीर रूप से घायल इंडियन रॉक पाइथन मिला, जिसके शरीर में ट्यूमर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की आशंका जताई गई। हालत इतनी नाजुक थी कि उसका इलाज किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। वन विभाग की अनुमति के बाद अजगर को पहले बिलासपुर के कानन पेंडारी ले जाया गया, लेकिन बेहतर उपचार के लिए उसे वाइल्डलाइफ डॉक्टर पीयूष दुबे के पास लाया गया। करीब 250 किलोमीटर के सफर के बाद शुरू हुआ इलाज किसी रोमांचक मिशन से कम नहीं था, जहां हर कदम पर सावधानी और विशेषज्ञता की जरूरत थी।

वन्यजीवों की दुनिया में इंडियन रॉक पाइथन एक विशाल और शक्तिशाली प्रजाति माना जाता है, लेकिन जब यही जीव गंभीर बीमारी और चोट से जूझ रहा हो, तो उसकी जान बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अंबिकापुर में रेस्क्यू के दौरान मिले इस अजगर की हालत देखकर विशेषज्ञों ने उसके शरीर में ट्यूमर और कैंसर जैसी समस्या की आशंका जताई। डीएफओ से अनुमति मिलने के बाद उसे बिलासपुर के कानन पेंडारी लाया गया, जहां डॉ. चंदन सर ने उसकी स्थिति का आकलन किया। इसके बाद बेहतर इलाज की उम्मीद में अजगर को वाइल्डलाइफ डॉक्टर पीयूष दुबे के पास पहुंचाया गया। करीब 250 किलोमीटर की दूरी तय कर बिलासपुर पहुंचे इस बेजुबान जीव के लिए अब हर पल महत्वपूर्ण था। चुनौती सिर्फ बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि एक विशाल और खतरनाक वन्यजीव को सुरक्षित रखते हुए उसकी शारीरिक स्थिति को संभालना भी था।

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अजगर का उपचार किसी सामान्य प्रक्रिया जैसा नहीं था। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एनेस्थीसिया देना, वेंटिलेटर पर रखकर सांसों की निगरानी करना, आईवी सेट के जरिए जरूरी उपचार देना और जरूरत के मुताबिक सीपीआर जैसी आपातकालीन प्रक्रिया अपनाना बेहद जटिल काम था। इसमें जरा सी चूक भी उपचार को मुश्किल बना सकती थी। लेकिन डॉक्टर पीयूष दुबे के अनुभव, समर्पण और आवश्यक उपकरणों की मदद से जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उपचार के बाद अजगर के शरीर में मूवमेंट शुरू होना और उसकी सेहत में सुधार दिखाई देना राहत भरा संकेत है। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंडियन रॉक पाइथन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-एक के तहत संरक्षित है। एक बेजुबान जीव की जिंदगी बचाने की यह कोशिश दिखाती है कि सही समय पर विशेषज्ञ उपचार और संवेदनशीलता से मुश्किल परिस्थितियों में भी उम्मीद की नई राह खुल सकती है।


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