रेलवे को पैसे दिए हैं, सीट पर सामान रखूंगा! वेंडर की अकड़
सामने आई जानकारी के मुताबिक, ट्रेन के जनरल डिब्बे में यात्रियों के बैठने के लिए बनी सीटों पर खाने-पीने का सामान रखा गया था। इनमें नमकीन के पैकेट, चिप्स और पानी की पेटियां शामिल थीं। सामान रखने के कारण यात्रियों को बैठने में परेशानी हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री ने वेंडर की इस हरकत पर आपत्ति जताई।
यात्री के विरोध करने पर वेंडर ने दावा किया कि उसके पास रेलवे का पांच साल का साइड पेंट्री टेंडर है। वेंडर का कहना था कि उसने रेलवे को इसके लिए पैसे दिए हैं, इसलिए वह जनरल कोच की सीटों पर सामान रखकर ले जा सकता है। हालांकि, उसके इस दावे और संबंधित टेंडर की शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना का एक और गंभीर पहलू टिकट जांच और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा है। वीडियो बनाने वाले यात्री ने दावा किया कि एक टीटीई पहले भी वहां से गुजरा था, लेकिन उसने सीटों पर रखे सामान को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि, टीटीई की कथित भूमिका के संबंध में भी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
रेलवे में यात्रियों को भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ट्रेन साइड वेंडिंग जैसी व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं। रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों में इन सेवाओं का उल्लेख है। हालांकि, किसी वेंडर के पास खानपान का ठेका होना और यात्री सीटों पर सामान रखने की अनुमति होना अलग-अलग विषय हैं। संबंधित अनुबंध की शर्तें सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जनरल कोच पहले से यात्रियों की भीड़ से भरे होते हैं, तब सामान रखने के लिए यात्री सीटों का इस्तेमाल कितना उचित है?फिलहाल वीडियो में दिख रही ट्रेन का नंबर, घटना का स्थान और संबंधित रेलवे जोन की पुष्टि नहीं हो सकी है। यात्रियों की शिकायत को देखते हुए रेलवे से मामले की जांच और स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है।
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