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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आयकर विभाग नहीं कर सकता पंजीकृत संस्था की गतिविधियों की दोबारा जांच


Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम की धारा 12AA के तहत पंजीकृत संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्था आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12AA के तहत वैध रूप से पंजीकृत है, तो आयकर विभाग को यह अधिकार नहीं है कि वह संस्था की गतिविधियों की वास्तविकता या स्वरूप की दोबारा जांच करे, खासकर तब जब वह संस्था धारा 80G के अंतर्गत टैक्स छूट का अनुमोदन प्राप्त करने की पात्रता रखती हो। यह निर्णय एक विशेष मामले में आया, जिसमें आधारशिला शिक्षण संघ नामक संस्था ने आयकर विभाग द्वारा धारा 80G के तहत छूट न देने के फैसले को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने इस मामले में रायपुर आयकर आयुक्त की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी), रायपुर पीठ के 15 जनवरी 2019 को दिए गए आदेश को बरकरार रखा। आधारशिला शिक्षण संघ ने 28 फरवरी 2014 को आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत टैक्स छूट के अनुमोदन के लिए आवेदन किया था। संस्था का उद्देश्य व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। संस्था ने आवेदन के साथ अपने ऑडिटेड वित्तीय विवरण, मूल दस्तावेज, और अन्य आवश्यक जानकारियां प्रस्तुत कीं। इसके बावजूद रायपुर के आयकर आयुक्त ने संस्था की गतिविधियों की वास्तविकता की जांच के लिए मूल्यांकन अधिकारी से रिपोर्ट मंगाई।
आयकर विभाग का रुख
मूल्यांकन रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि संस्था फीस लेती है, सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से आर्थिक सहायता प्राप्त करती है, और इसके कुछ भवन वाणिज्यिक किराये पर दिए गए हैं। इसके अलावा, संस्था ने अधोसंरचना विकास के लिए बड़े ऋण भी लिए हैं। इन तथ्यों को आधार बनाते हुए आयकर आयुक्त ने 25 अगस्त 2014 को यह कहकर छूट का आवेदन अस्वीकार कर दिया कि संस्था परोपकारी नहीं बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न है।
न्यायाधिकरण का फैसला संस्था के पक्ष में
इस आदेश से असंतुष्ट होकर संस्था ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण, रायपुर पीठ में अपील दाखिल की। 15 जनवरी 2019 को पारित आदेश में अधिकरण ने संस्था की अपील को स्वीकार करते हुए यह कहा कि जब एक संस्था को पहले ही आयकर अधिनियम की धारा 12AA के तहत पंजीकरण मिल चुका है और वह पंजीकरण वैध है, तो आयकर आयुक्त को यह अधिकार नहीं है कि वह 80G के तहत छूट देने से इंकार करे। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि आयकर विभाग ने जब एक बार संस्था की गतिविधियों की जांच कर उसे पंजीकृत किया है और पंजीकरण रद्द नहीं किया गया है, तो यह कहना कि संस्था की गतिविधियां परोपकारी नहीं हैं, अनुचित और कानून के खिलाफ है।
हाईकोर्ट की पुष्टि
रायपुर आयकर आयुक्त ने इस आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मगर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्णय को पूरी तरह उचित ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि 12AA के तहत वैध रूप से पंजीकृत संस्था की गतिविधियों की प्रामाणिकता पर पुनः सवाल खड़ा करना आयकर विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, जब तक कि पंजीकरण को रद्द नहीं किया गया हो।
निर्णय का व्यापक प्रभाव

इस फैसले से स्पष्ट होता है कि आयकर विभाग को अपने ही द्वारा दिए गए पंजीकरण पर संदेह करने और बार-बार संस्था की नीयत पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट का यह निर्णय ना केवल आधारशिला शिक्षण संघ के पक्ष में राहत लेकर आया है, बल्कि अन्य परोपकारी एवं शैक्षणिक संस्थाओं के लिए भी एक मिसाल बन गया है, जो नीतिगत रूप से समाज सेवा में कार्यरत हैं। यह फैसला परोपकारी संस्थाओं के लिए आर्थिक छूट प्राप्त करने के मार्ग को आसान बना सकता है और ब्यूरोक्रेटिक अड़चनों में कमी लाने में सहायक सिद्ध होगा।

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