Ayodhya: रामनगरी बनेगी रोशनी की रानी, अयोध्या लिखेगी दीपों से नया विश्व इतिहास

रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने राम की पैड़ी पहुँचकर दीपोत्सव की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।
बताया जा रहा है कि सुबह 10 बजे विश्वविद्यालय परिसर से सात बसों में स्वयंसेवक “जय श्री राम” का उद्घोष करते हुए दीपोत्सव स्थल के लिए रवाना हुए। दीपोत्सव परिवहन समिति के समन्वयक प्रोफेसर अनूप कुमार की देखरेख में घाटों को दीयों से सजाने का काम शुरू हुआ।
56 घाटों को सजाने का काम जोरों पर है। युवा स्वयंसेवक बड़े उत्साह और लगन से दीयों को सजा रहे हैं। दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रोफेसर अनूप कुमार ने बताया कि संत शरण मिश्र ने बताया कि सभी दीपों को सजाने का काम 18 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। 19 अक्टूबर को, दीपोत्सव के दिन, स्वयंसेवक दीपों में तेल और बाती भरकर उन्हें प्रज्वलित करेंगे। इस बार 56 घाटों पर कुल 26.11 लाख दीप जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा। घाटों पर कुल 28 लाख दीप रखे जा रहे हैं।
दीपोत्सव: भारत की सांस्कृतिक भावना का प्रदर्शन
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि यह दीपोत्सव केवल अयोध्या का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक भावना का वैश्विक प्रदर्शन है। घाटों पर कार्यरत युवाओं की सेवा और समर्पण की भावना इस आयोजन को राममय अयोध्या की आत्मा बना रही है।
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