शिमला की नो-कंस्ट्रक्शन जोन में खाली प्लॉट खरीदेगी सरकार

शिमला। राजधानी शिमला के कई हिस्सों को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करने के कैबिनेट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित भू-मालिकों को राहत देने की तैयारी कर ली है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग इन क्षेत्रों में स्थित खाली प्लॉटों को सरकारी दरों पर खरीदकर भू-मालिकों को मुआवजा देगा, ताकि निर्माण पर रोक लगने से उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। मंत्रिमंडल ने हाल ही में हुई बैठक में शहर के भीड़भाड़ वाले कोर एरिया सहित कई हिस्सों में सभी नए निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को मंजूरी दी थी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि जिन खाली प्लॉटों पर अधिसूचना जारी होने के बाद निर्माण की अनुमति नहीं होगी, उन्हें इच्छुक भू-मालिक सरकार को बेच सकेंगे। ऐसे मामलों में सरकार संबंधित भूमि को सरकारी दरों पर खरीदेगी। गौरतलब है कि पूर्व में इन भू-मालिकों ने आवश्यकता आधारित ढाई मंजिला मकानों के निर्माण की अनुमति की मांग को लेकर संगठन बनाया था। बाद में उच्चतम न्यायालय से शिमला डेवलपमेंट प्लान-2041 को मंजूरी मिलने के बाद उन्हें इस संबंध में

राहत मिली थी।

नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि जिन भू-मालिकों के खाली प्लॉट निर्माण प्रतिबंध के दायरे में आएंगे, उन्हें सरकार भूमि खरीदकर मुआवजा देगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिमला की हरियाली, पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखना है, क्योंकि बड़ी संख्या में पर्यटक यहां के स्वच्छ और शांत वातावरण का आनंद लेने आते हैं। वर्ष 2000 में जब राज्य सरकार ने 17 ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में नए निर्माण पर प्रतिबंध लगाया था, तब प्रभावित भू-मालिकों के लिए किसी प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं किया गया था। उस समय करीब 100 भू-मालिक प्रभावित हुए थे। इस बार प्रतिबंध का दायरा अधिक बड़ा होने के कारण प्रभावित होने वाले भू-मालिकों की संख्या भी पहले से अधिक रहने की संभावना है। राज्य सरकार जिन क्षेत्रों को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित करेगी, उनमें संजौली से गुजरने वाली सडक़ के ऊपर का पूरा क्षेत्र, कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, आईजीएमसी, लक्कड़ बाजार, रिज, रानी झांसी पार्क, मॉल रोड, इंदिरा गांधी खेल परिसर, क्लाक्र्स होटल, ओक ओवर, छोटा शिमला और वहां से वापस संजौली तक का क्षेत्र शामिल है।

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