Delhi H1N1 Surge: दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे H1N1 स्वाइन फ्लू के मामले; जानें लक्षण, हाई-रिस्क ग्रुप और बचाव के उपाय

नई दिल्ली: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में इस सीजन H1N1 इन्फ्लुएंजा (स्वाइन फ्लू) के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है. स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में दिल्ली में अब तक 1,344 H1N1 संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान केवल 229 मामले दर्ज किए गए थे.

मामलों में हुई लगभग छह गुना वृद्धि को देखते हुए प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. मानसून के बाद के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में तेज बुखार, खांसी और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह भी पढ़ें: Chandipura Virus Outbreak: गुजरात और राजस्थान में चांदीपुरा वायरस का कहर; जानें इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के उपाय

H1N1 इन्फ्लुएंजा के मुख्य लक्षण

एम्स (AIIMS) दिल्ली और प्रमुख निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के अनुसार, H1N1 के अधिकांश मामले हल्के होते हैं और बुखार आमतौर पर तीन से पांच दिनों के भीतर उतर जाता है. हालांकि, समय पर पहचान न होने पर यह गंभीर रूप भी ले सकता है.

संक्रमण के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज बुखार और शरीर में कंपन

  • गले में खराश या दर्द

  • सूखी खांसी और बहती नाक

  • तेज सिरदर्द और मांसपेशियों में जकड़न

  • अत्यधिक थकान और कमजोरी

किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

यद्यपि यह वायरल संक्रमण सामान्य स्वस्थ वयस्कों में 5 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ संवेदनशील समूहों में इसके गंभीर जटिलताएं पैदा करने का जोखिम अधिक रहता है.

डॉक्टरों के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों के लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

  1. बुजुर्ग और छोटे बच्चे: कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण.

  2. क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित मरीज: डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या किडनी की बीमारी से ग्रसित लोग.

  3. सांस के मरीज: सीओपीडी (COPD) या अस्थामा के मरीज.

  4. इम्यूनोकोम्प्रोमाइज्ड व्यक्ति: जिनकी इम्युनिटी किसी बीमारी या इलाज के कारण कमजोर है.

कब लें डॉक्टर की सलाह?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द हो या कफ में खून आए, तो बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. हाई-रिस्क ग्रुप के मरीजों को लक्षण दिखते ही चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है.

बचाव और रोकथाम के उपाय (Dos and Don’ts)

इन्फ्लुएंजा और अन्य श्वसन संक्रमणों के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

.




Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button