800 रुपए की वेतन से होता था अमिताभ बच्चन का गुजारा
अपनी अदाकारी के दम पर बालीवुड के शहंशाह का खिताब हासिल करने वाले अमिताभ बच्चन आज अपना 77वां जन्मदिन मना रहे हैं। सदी के महानायक का फिल्मी कैरियर का सफर बेहद उतार चढ़ाव रहा। कभी राजनीति में गए और बुरी तरह फेल होकर लौटे तो कभी खुद की कंपनी खोली और पाई पाई के लिए मोहताज हो गए। आज महानायक के जन्मदिन पर आज उनसे जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में जानेंगे।
1- अमिताभ को अपने करियर के शुरुआती दिनों में वह दिन भी देखना पड़ा जब उनकी आवाज को लोगों ने नकार दिया था। फिल्म जगत में अपने करियर के शुरुआती दिनों में अमिताभ बच्चन ने ‘आकाशवाणी’ में भी अनाउंसर पद के लिए आवेदन किया लेकिन वहां काम करने का अवसर नहीं मिला। यहां तक कि फिल्म ‘रेशमा’ और ‘शेरा’ में अपनी अच्छी आवाज के बावजूद उन्हें मूक भूमिका भी स्वीकार करनी पड़ी।
2- 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में जन्में अमिताभ बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत कोलकत्ता में बतौर सुपरवाइजर की जहां उन्हें 800 रुपये मासिक वेतन मिला करता था। साल 1968 मे कलकत्ता की नौकरी छोड़ने के बाद मुंबई आ गये। बचपन से ही अमिताभ बच्चन का झुकाव अभिनय की ओर था और दिलीप कुमार से प्रभावित रहने के कारण वह उन्हीं की तरह अभिनेता बनना चाहते थे।
3- महानायक की जिंदगी से जुड़े तथ्य अब इतने आम हो गए हैं कि जो उनके चाहने वाले नहीं हैं, वे जानते हैं कि अमिताभ को कूली फिल्म की शूटिंग के वक्त ऐसी चोट लगी थी कि मरते-मरते बचे थे या फिर कि अमिताभ बच्चन फिल्मों में जबर्दस्त हिट होने के बाद अमिताभ बच्चन कॉरर्पोरेशन लिमिटेड (एबीसीएल) बनाकर तबाह हो गए थे। फिर उन्होंने दोबारा पारी शुरू की। या फिर ये बातें कि राजीव गांधी के सानिध्य में उन्होंने अपनी राजनैतिक पारी शुरू की थी। लेकिन बोफोर्स घोटाले में कथित तौर पर नाम आने के बाद उन्होंने सालों तक मीडिया से बात बंद कर दी थी।
5- साल 1969 में अमिताभ बच्चन को पहली बार ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ में काम करने का मौका मिला लेकिन इस फिल्म के असफल होने के कारण वह दर्शकों के बीच कुछ खास पहचान नहीं बना पाये।
6- 1984 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और इलाहाबाद से सांसद का चुनाव लड़े तथा सांसद के रूप में चुन लिये गये लेकिन अमिताभ बच्चन को अधिक दिनों तक राजनीति रास नहीं आई और तीन वर्ष तक काम करने के बाद उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया। इसकी मुख्य वजह यह थी कि उनका नाम उस समय बोफोर्स घोटाले में खींचा जा रहा था।
7- अमिताभ बच्चन जिस उंचाई पर पहंच चुके थे इसका सही अंदाज लोगों को तब लगा जब 1982 में निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई की फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान वह गंभीर रूप से घायल होने के बाद लगभग मौत के मुंह मे पहुंच गए थे। इसके बाद देश के हर मंदिर, मस्जिद और गुरुदारे में लोगों ने उनके ठीक होने की दुआएं मांगी मानों अमिताभ बच्चन उनके ही अपने परिवार का कोई अंग हो। लोगो की दुआएं रंग लाई और अमिताभ जल्द ही ठीक को गये।




