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BREAKING: ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में बिक रही नकली चाय, मामलें में जांच जारी


Balasore. बालासोर। ओडिशा के बालासोर जिले में पुलिस ने एक फैक्ट्री पर छापा मारकर नकली चाय बनाने और देश के बड़े ब्रांडों के नाम का गलत इस्तेमाल करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह फैक्ट्री जलेश्वर थाना क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग 60 के पास अग्रवाल चौक पर चल रही थी। कई बार की गई शिकायतों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने इस गोरखधंधे पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसके बाद एक विशेष टीम और स्थानीय पुलिस ने मिलकर इस नकली चाय पैकिंग फैक्ट्री पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान पुलिस को कई जानी मानी

कंपनियों के नाम और लोगो वाली पैकिंग में नकली चाय बिकती हुई मिली। जांच में सामने आया कि स्थानीय बाजार से सस्ती चाय खरीदकर उसे बड़े ब्रांड्स के नाम से पैक करके बेचा जा रहा था। हैरानी की बात तो यह थी कि यह फैक्ट्री एक किराए के मकान में ऑटो पार्ट्स की दुकान के नाम से चल रही थी। बाहर एक साइनबोर्ड भी लगाया गया था ताकि किसी को शक न हो। लेकिन अंदर बड़े पैमाने पर नकली चाय की पैकिंग का काम चल रहा था।

पुलिस ने मौके से चाय पैकिंग मशीनें, कई बड़े ब्रांड्स के लोगो छपे पॉलिथीन बैग और पैकिंग का अन्य सामान जब्त कर लिया। पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि फैक्ट्री पिछले 2-3 सालों से यह गोरखधंधा कर रही थी। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर निशान मट्टू ने छापेमारी के बाद कहा, ‘हमें यहां टाटा टी गोल्ड और टाटा टी प्रीमियम जैसी पैकेजिंग वाले प्रोडक्ट मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। हमने सभी प्रोडक्ट को एक जगह इकट्ठा कर लिया है और अब इनकी सूची तैयार करेंगे। इसके बाद मैं एक रिपोर्ट बनाऊंगा, जिसमें

फैक्ट्री मालिक की बात भी सुनी जाएगी और उनसे हस्ताक्षर लिए जाएंगे। फिर यह रिपोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट में जमा की जाएगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ये लोग टाटा टी का नाम तो इस्तेमाल नहीं कर रहे थे, लेकिन उसकी तरह की पैकिंग, प्रिंट, रंग और फॉन्ट का उपयोग कर नकली चाय बेच रहे थे। उन्हें इस मामले की जांच के लिए 25 नवंबर को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के तहत नियुक्त किया गया था। हालांकि, यह फैक्ट्री कब से चल रही थी, इसकी उन्हें सही जानकारी नहीं है। फैक्ट्री मालिकों ने दावा किया कि उन्होंने जनवरी 2024 में इसका निर्माण शुरू किया और सितंबर 2024 में बंद कर दिया, लेकिन इस दावे को साबित करने के लिए उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। मैंने उनसे इनवॉइस और अकाउंट्स की जानकारी मांगी, लेकिन वे कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे।’

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