#Social

HP: वन्य जीव संरक्षण को बनेंगे सब-वे


Hamirpur. हमीरपुर। जंगलों से घिरे पहाड़ी प्रदेश में पिछले कुछ समय से सडक़ों का जाल बिछा है। अब फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी पहाड़ी राज्य की भाग्य रेखाओं में शुमार हुए हैं जो कि अधिकतर जंगल के एरिया से निकल रहे हैं। विकास की इस रफ्तार में वन्य जीव प्रभावित और बेघर न हों इसके लिए पहाड़ी राज्य में पहली बार सब-वे बनेंगे। एरिया के टेरिटोरियल डीएफओ इसके लिए वाइल्ड लाइफ प्लान बना रहे हैं। इसमें जिन जगहों पर जंगली जानवरों की रेगुलर क्रॉसिंग होती है वहां पर सब-वे या यूं कहें कि ओवरपास या फिर अंडरपास बनाए जाएंगे। दरअसल हिमाचल में पहले जो भी रोड बने हैं चाहे वे लोकल सडक़ें हों, स्टेट हाई-वे हों या फिर नेशनल हाई-वे उन्हें ज्यादातर उस क्षेत्र से गुजारा गया, जहां रिहाइशी इलाका ज्यादा हो। लेकिन फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्टों में यह कर पाना संभव नहीं था इसलिए ये मार्ग ज्यादातर जंगल के एरिया से

निकल रहे हैं।

इससे हो यह रहा है कि जंगली जानवर एक तो रिहायशी इलाकों की ओर आने लगे हैं। दूसरा बड़ा सवाल यह था कि जब फोरलेन पूरी तरह से सक्रिय हो जाएंगे और सारा ट्रैफिक इनमें डायवर्ट हो जाएगा, तो यह रात दिन चलेंगे और इन मार्गों पर स्पीड भी बेतहाशा रहेगी। ऐसे में खासकर रात के समय यदि कोई भी जंगली जानवर रोड क्रॉस करेगा, तो दुर्घटना के पूरे चांस रहेंगे। इसे देखते हुए वन विभाग के सहयोग से ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां से जंगली जानवर एक से दूसरी जगह जाते हैं। उन जगहों पर सब-वे बनाए जाएंगे, ताकि वन्य जीवों आसानी से आर-पार जा सकें और ईको सिस्टम भी बना रहे। हिमाचल में जिन वन क्षेत्रों से फोरलेन गुजर रहे हैं वहां अधिकतर सूअर, नीलगाय, सांभर, कक्कड़, गीदड़ हिरन जैसे जानवर होते हैं, जो कि झुंडों में चलते हैं। इनके अलावा बाघ, तेंदुए, खरगोश और कई प्रकार के जानवरों और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button