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NMDC की स्लरी पाइपलाइन के गड्ढे में डूबा मासूम, 10 वर्षीय टिकेश्वर की मौत


Dantewada. दंतेवाड़ा। जिले के गीदम थाना क्षेत्र अंतर्गत हाऊरनार ग्राम पंचायत में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें एक 10 वर्षीय मासूम बालक की जान चली गई। बच्चा एनएमडीसी की स्लरी पाइपलाइन परियोजना के लिए खोदे गए गड्ढे में डूब गया। मृतक की पहचान टिकेश्वर के रूप में हुई है, जो कक्षा चौथी का छात्र था। इस हादसे से पूरे गांव में मातम का माहौल है, वहीं परिजनों और ग्रामीणों ने एनएमडीसी प्रबंधन और ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
स्कूल से छुट्टी के बाद खेत की ओर गया था टिकेश्वर
घटना की जानकारी के अनुसार सोमवार को स्कूल से छुट्टी के बाद टिकेश्वर खेत की ओर गया था। वहां एनएमडीसी द्वारा स्लरी पाइपलाइन बिछाने के लिए गहरे गड्ढे खोदे गए थे, जिनमें हाल की बारिश के चलते पानी भर गया था। टिकेश्वर खेलते हुए ऐसे ही एक गड्ढे के पास पहुंच गया और अनजाने में उसमें गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उसके साथ एक बच्ची भी थी, जो डूबने लगी, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे बचा लिया। दुर्भाग्यवश टिकेश्वर को समय पर बाहर नहीं निकाला जा सका और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामीणों में आक्रोश, बोले- “अगर समय रहते गड्ढा पाटा जाता तो बच जाती जान”
घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया है। परिजनों ने एनएमडीसी और ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस जगह से पाइपलाइन ले जानी है, वहां पिछले कई हफ्तों से गड्ढे खोदकर छोड़े गए हैं। काम अधूरा पड़ा हुआ है और न तो गड्ढों के आसपास कोई सुरक्षा घेरा बनाया गया, न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पहले भी कई मवेशी इन गड्ढों में गिरकर मर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मृतक टिकेश्वर के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “अगर ठेकेदार समय रहते गड्ढा भरवा देता या वहां कोई सुरक्षा इंतजाम होता, तो मेरा बेटा आज जिंदा होता। हमारी जमा पूंजी का एक चिराग बुझ गया। अब इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
ठेकेदार का जवाब – “लगातार बारिश से कार्य रुका, जल्द काम पूरा करेंगे”
मीडिया से बातचीत में ठेकेदार ने बताया कि पिछले 6 से 7 दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिस वजह से पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रभावित हुआ है। ठेकेदार ने कहा, “बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है और मशीनों की आवाजाही भी संभव नहीं हो पाई। हमें एनएमडीसी की ओर से जल्द कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जैसे ही मौसम साफ होगा, हम दिन-रात काम कर इस काम को जल्द से जल्द पूरा करेंगे।” हालांकि इस जवाब से परिजन और ग्रामीण संतुष्ट नहीं दिखे।
प्रशासनिक बयान – जांच जारी, पुलिस मौके पर पहुंची
गीदम थाना प्रभारी विजय पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया, “हाऊरनार ग्राम पंचायत में एनएमडीसी की पाइपलाइन परियोजना के लिए खोदे गए गड्ढे में एक बालक के डूबने की सूचना मिली थी। शव को बाहर निकाल कर पंचनामा और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है।” वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और एनएमडीसी प्रबंधन से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों ने परिजनों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
ग्रामीणों ने की मुआवजे और सुरक्षा इंतजाम की मांग
हादसे से आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन और एनएमडीसी से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना के काम के दौरान किसी भी मानक का पालन नहीं किया जा रहा है। न सुरक्षा व्यवस्था है, न कोई चेतावनी। गड्ढे खोलकर महीनों तक ऐसे ही छोड़ दिए गए हैं। अगर यही हाल रहा तो आगे और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि
परिजनों को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए
सभी गड्ढों को तत्काल पाटा जाए या उन्हें ढकने की व्यवस्था की जाए
काम पूरा होने तक सुरक्षा गार्ड की तैनाती हो
जिम्मेदार ठेकेदार और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाए
घटना के बाद कई स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी आवाज उठाई है। बस्तर जनअधिकार मंच के संयोजक ने कहा, “यह घटना केवल लापरवाही नहीं बल्कि एक तरह से प्रशासनिक हत्या है। विकास परियोजनाओं के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालना अपराध है। हम इस घटना को लेकर कलेक्टर और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे।”

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