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आदिवासी महिला से दुष्कर्म मामले में नबी आलम खान को आजीवन कारावास की सजा

Raipur. रायपुर। अनुसूचित जाति वर्ग की एक युवती को शादी का झांसा देकर बार-बार दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने वाले आरोपी नबी आलम खान को SC/ST एक्ट की स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए तीन अलग-अलग धाराओं में कठोर सजा सुनाई है और पीड़िता को अधिकतम मुआवजा देने की अनुशंसा भी की है।
🔴 घटना का विवरण:
पीड़िता अनुसूचित जाति की अविवाहित महिला है, जो वर्ष 2022 में रायपुर के गुढियारी इलाके में किराए के मकान में रहती थी। वहीं उसकी मुलाकात नबी आलम खान से हुई। आरोपी ने उसे नौकरी और शादी का झांसा देकर एक अलग मकान दिलवाया और 15 जून 2022 से 9 सितंबर 2023 के बीच कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब पीड़िता गर्भवती हुई, तो आरोपी ने जबरन दवा खिलाकर उसका गर्भपात भी करवा दिया। विरोध करने पर आरोपी उसे मारता-पीटता था। डर के कारण पीड़िता चुप रही, लेकिन दिसंबर 2024 में उसने साहस जुटाकर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
⚖️ अदालती कार्यवाही और फैसला:
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से 14 गवाह पेश किए गए, जिनमें चिकित्सक, मकान मालिक और प्रत्यक्षदर्शी शामिल थे। न्यायालय ने पाया कि आरोपी ने पीड़िता की कमजोर सामाजिक स्थिति का नाजायज फायदा उठाया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी यह जानते हुए भी कि पीड़िता अनुसूचित जाति से है, उसके साथ धोखा और अत्याचार करता रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी अगर अर्थदंड नहीं भरता है, तो उसे अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
🧾 सजा का विवरण:
दुष्कर्म के लिए आजीवन कारावास
गर्भपात कराने के लिए कठोर कारावास
SC/ST एक्ट के तहत अलग से सजा व जुर्माना
पीड़िता को पुनर्वास हेतु अधिकतम मुआवजा देने की अनुशंसा
यह फैसला अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और महिला सम्मान के प्रति न्यायपालिका की सख्त मंशा को दर्शाता है।




