ओडिशा के खनिज अधिकारों पर BJD का जोर सुजाता राउत ने साधा निशाना

भुबनेश्वर : बीजू जनता दल (BJD) की नेता सुजाता राउत कार्तिकेयन ने सोमवार को माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संशोधन से ओडिशा जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व हित प्रभावित होंगे।सुजाता राउत ने कहा कि किसी राज्य की खनिज संपदा पर टैक्स लगाने और उससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल जनता के कल्याण के लिए करना राज्य का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर BJP के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों की आलोचना की।

राज्य के अधिकारों का मुद्दा उठाया

मीडिया से बातचीत के दौरान BJD नेता ने कहा कि खनिज संपदा वाले राज्यों को अपनी जरूरतों और विकास कार्यों के लिए राजस्व जुटाने का अधिकार होना चाहिए।उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से मिलने वाली आय का उपयोग राज्य के लोगों के हित में किया जाता है। ऐसे में राज्यों के वित्तीय अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।

BJP सांसदों पर साधा निशाना

सुजाता राउत कार्तिकेयन ने संसद में इस विधेयक का समर्थन करने वाले ओडिशा के BJP सांसदों की भी आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सांसदों ने राज्य के हितों की रक्षा नहीं की और इस कदम से ओडिशा के साथ अन्याय हुआ है।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने राज्य के अधिकारों और हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

राजस्व नुकसान का जताया दावा

BJD नेता ने दावा किया कि MMDR संशोधन अधिनियम, 2026 के लागू होने से ओडिशा को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हो सकता है।उन्होंने कहा कि ओडिशा देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिज क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है।ऐसे में खनिजों से जुड़े राजस्व में कमी आने का असर विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों पर पड़ सकता है।

खनिज संपदा वाले राज्यों की भूमिका

ओडिशा में लौह अयस्क, कोयला और अन्य खनिजों के बड़े भंडार हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य सरकार के लिए बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों में उपयोग किया जाता है।BJD का कहना है कि संशोधन के बाद राज्यों की वित्तीय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल

सुजाता राउत ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों और संघीय व्यवस्था को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में राज्यों की भागीदारी और हितों को महत्व मिलना चाहिए।

राजनीतिक विवाद बढ़ने के संकेत

MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर BJD और BJP के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। BJD लगातार राज्य के अधिकारों और राजस्व से जुड़े मुद्दों को उठा रही है।वहीं, केंद्र सरकार की ओर से इस संशोधन के उद्देश्यों और प्रभावों को लेकर अलग पक्ष रखा जाता रहा है।

ओडिशा में खनिज नीति को लेकर चर्चा

ओडिशा जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों में खनन नीति और उससे मिलने वाले राजस्व का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।राज्य सरकारें अक्सर खनिज संसाधनों से होने वाली आय को स्थानीय विकास और जनकल्याण से जोड़ती हैं।सुजाता राउत कार्तिकेयन के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।

आगे की रणनीति पर नजर

BJD ने संकेत दिया है कि वह राज्य के वित्तीय अधिकारों और खनिज राजस्व से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी।MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर संसद और राज्यों के बीच चल रही बहस आने वाले समय में भी राजनीतिक और नीतिगत चर्चा का विषय बनी रह सकती है।


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