जैविक खेती में करोड़ों का घोटाला! बीज निगम से दोगुने दाम पर खरीदी गई खाद, टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक कृषि विकास योजना (PKVY) और जैविक खेती मिशन के तहत जैविक कृषि सामग्री की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। वर्ष 2026-27 के लिए जैविक खेती की सामग्री खरीदने हेतु 10 जिलों को लगभग 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। आरोप है कि अधिकारियों ने मिलीभगत कर कई उत्पाद छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम की दरों से दो से तीन गुना अधिक कीमत पर खरीदे, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा।
बताया जा रहा है कि बीज निगम से 470-471 रुपये में उपलब्ध जैविक खाद को निजी फर्मों के माध्यम से 1,100 रुपये में खरीदा गया। इसी तरह अन्य जैविक उत्पाद भी बाजार और निगम की तुलना में कहीं अधिक दरों पर खरीदे गए।
खिलौनों की श्रेणी में निकाला खाद खरीद का टेंडर
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जैविक खाद और कृषि सामग्री की खरीद के लिए जारी टेंडर को ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर ‘खिलौने, उपहार सामग्री और बैडमिंटन रैकेट’ जैसी श्रेणी में प्रकाशित किया गया। इससे सामान्य कृषि आपूर्ति करने वाली कई कंपनियां टेंडर की जानकारी से वंचित रह गईं और प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई।
सूत्रों के अनुसार, पहले सात जिलों का काम दो कंपनियों को दिया गया था। बाद में शेष जिलों में भी सीमित कंपनियों को ही काम मिलने की बात सामने आई है।
तीन जिलों के उदाहरण से समझिए पूरा मामला
दंतेवाड़ा
- लगभग 97 लाख रुपये की खरीदी।
- कार्य सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज को दिया गया।
- करीब 15 प्रकार की सामग्री खरीदी गई।
- अधिकांश वस्तुओं की कीमत बीज निगम की दर से दोगुने से अधिक बताई गई।
कोंडागांव
- लगभग 1.10 करोड़ रुपये का कार्य सिद्धार्थ इंटरप्राइजेज को मिला।
- टेंडर की श्रेणी बदले जाने के कारण कई कंपनियां प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हो सकीं।
- कई संभावित आपूर्तिकर्ताओं को टेंडर की जानकारी तक नहीं मिली।
कोरबा
- लगभग 48 लाख रुपये का कार्य ऑलिवन इंडस्ट्रीज को दिया गया।
- संबंधित कंपनी का नाम पहले भी डीएमएफ घोटाले से जुड़ चुका है और उसके कई ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हो चुकी है।
- ऐसे में इस कंपनी को कार्य दिए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बीज निगम और खरीदी दरों में बड़ा अंतर
| सामग्री | बीज निगम का रेट (₹) | GEM से खरीदी (₹) |
|---|---|---|
| जिंक घुलनशील जीवाणु (1 लीटर) | 199 | 330 |
| पोटेशियम गतिशील जीवाणु (1 लीटर) | 199 | 330 |
| जैविक खाद (25 किलो) | 471 | 1100 |
| लिक्विड कंसोर्टिया (1 लीटर) | 199 | 330 |
| माइकोराइजा (1 किलो) | 109 | 245 |
| ट्राइकोडर्मा (1 किलो) | 176 | 272 |
| जिंक सल्फेट 21% (5 किलो) | 200 | 400 |
| पीडीएम/पीडीओ (1 लीटर) | 450 | 780 |
(सभी दरें रुपये में)
विभाग ने जांच का दिया भरोसा
कृषि विभाग के संचालक राहुल देव ने कहा कि जिलों में टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से खरीदी की जाती है। यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं—
- जब बीज निगम से कम कीमत पर सामग्री उपलब्ध थी, तो निजी कंपनियों से अधिक दाम पर खरीद क्यों की गई?
- टेंडर को कृषि सामग्री की बजाय खिलौनों और उपहार सामग्री की श्रेणी में क्यों प्रकाशित किया गया?
- क्या सीमित कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर टेंडर प्रक्रिया बदली गई?
- करोड़ों रुपये की इस खरीद की स्वतंत्र जांच होगी या नहीं?
अब यह मामला सामने आने के बाद जैविक खेती योजनाओं में पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और कृषि विभाग से जवाब मांग सकता है।
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