दिल्ली में मोदी-पुतिन की खास कार राइड

Delhi दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति की कड़ी सुरक्षा वाली ‘ऑरस सीनेट’ (Aurus Senat) कार में एक साथ यात्रा की – हाल के महीनों में यह तीसरी बार था। उन्होंने भारत मंडपम में अपनी द्विपक्षीय बैठक के बाद यह सवारी की और ‘पहियों पर बने किले’ (fortress on wheels) का इस्तेमाल करके INNOPROM (इनोप्रोम) प्रदर्शनी स्थल तक पहुँचे, जहाँ दुनिया भर के निर्माता जुटे थे।

पुतिन का ‘पहियों पर बना किला’

अक्सर ‘पहियों पर बना किला’ कही जाने वाली ऑरस सीनेट, एक लग्ज़री लिमोज़ीन से कहीं ज़्यादा है। विदेश यात्रा के दौरान पुतिन इसी गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं और दुनिया के सबसे सुरक्षित नेताओं में से एक की सुरक्षा व्यवस्था का यह एक अहम हिस्सा है। पुतिन के बड़े काफिले में लगभग दो दर्जन गाड़ियाँ हो सकती हैं, लेकिन विदेश यात्रा के दौरान ऑरस सीनेट ही मुख्य आकर्षण होती है। भारी बख्तरबंद (armoured) लिमोज़ीन को बैलिस्टिक हमलों और धमाकों सहित गंभीर सुरक्षा खतरों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रूसी लग्ज़री कार निर्माता ऑरस मोटर्स द्वारा विकसित, सीनेट रूस के ‘कोर्टेज़’ (Kortezh) प्रोजेक्ट से निकली है। यह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के लिए देश में ही विकसित लग्ज़री और बख्तरबंद गाड़ियाँ बनाने का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम था। इसकी स्टाइलिंग सोवियत-युग की ZIS-110 लिमोज़ीन से प्रेरित है।

ऑरस प्रोजेक्ट में रूस का सरकारी रिसर्च इंस्टीट्यूट NAMI, सोलर्स JSC और UAE-स्थित तवाज़ुन होल्डिंग शामिल थे। सीनेट का एक आम नागरिकों वाला वर्शन भी बनाया जाता है, हालाँकि सीमित संख्या में। खबरों के अनुसार, आम नागरिकों वाले स्टैंडर्ड मॉडल की कीमत लगभग 18 मिलियन रूबल या लगभग 2.5 करोड़ रुपये है, जबकि पुतिन का प्रेसिडेंशियल वर्शन काफी अलग है; इसकी आर्मर और सुरक्षा से जुड़ी जानकारियाँ गुप्त रखी गई हैं।

पुतिन की ऑरस इतनी सुरक्षित क्यों है?

प्रेसिडेंशियल सीनेट की सटीक खूबियाँ गुप्त रखी गई हैं, लेकिन माना जाता है कि इस लिमोज़ीन में ज़बरदस्त बैलिस्टिक सुरक्षा और धमाका-रोधी बनावट है। इस कार में 4.4-लीटर ट्विन-टर्बोचार्ज्ड V8 इंजन के साथ हाइब्रिड सिस्टम लगा है, जो लगभग 598 hp की पावर और 880 Nm का टॉर्क देता है। इसमें नौ-स्पीड वाला ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन है। सीनेट की लंबाई लगभग 5.63 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर और ऊँचाई 1.7 मीटर है, और इसका व्हीलबेस 3.3 मीटर है। इसकी टॉप स्पीड लगभग 160 kmph बताई जाती है, और यह लगभग नौ सेकंड में 0 से 100 kmph की रफ़्तार पकड़ सकती है।

इसकी मज़बूत बॉडी के अलावा, इस लिमोज़ीन में मॉडर्न ड्राइविंग और सेफ्टी सिस्टम भी हैं, जैसे अडैप्टिव क्रूज़ कंट्रोल, लेन-डिपार्चर वॉर्निंग, ट्रैक्शन कंट्रोल और एडवांस्ड ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी। इसके केबिन में लेदर, लकड़ी की ट्रिमिंग और बेहतरीन कम्युनिकेशन और इंफोटेनमेंट इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया गया है। इस गाड़ी को मुश्किल मौसम में भी चलने के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है, जो राष्ट्रपति की गाड़ी के लिए एक ज़रूरी बात है क्योंकि इसे अलग-अलग देशों और मौसमों में भरोसेमंद तरीके से काम करना होता है।

दिल्ली की सड़कों पर कूटनीति

शुक्रवार की यात्रा ने भारत-रूस संबंधों के प्रतीकात्मक महत्व को और बढ़ाया। आपसी बातचीत के बाद, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया। यह प्राचीन तमिल रचना कवि-संत तिरुवल्लुवर की है। मोदी ने पुतिन से कहा, “दो हज़ार साल पहले, तिरुवल्लुवर ने तिरुक्कुरल लिखा था। इसमें इंसानी ज़िंदगी के हर पहलू को शामिल किया गया है।” उन्होंने कहा कि इसके रूसी अनुवाद से दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध मज़बूत होंगे।

बाद में, X पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि उन्होंने पुतिन को रूसी अनुवाद भेंट किया है। उन्होंने इस रचना को तिरुवल्लुवर की “शाश्वत समझ” को भाषाओं और सीमाओं के पार ले जाने वाला बताया। दोनों नेताओं की साथ में की गई यह यात्रा कई अहम मुद्दों पर हुई बातचीत के दौरान हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी और पुतिन ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संबंधों में सहयोग की समीक्षा की, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर विचार-विमर्श किया। मोदी ने भारत का रुख दोहराया कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है और नई दिल्ली शांति प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है। रूस भारत के अहम रणनीतिक साझेदारों और रक्षा क्षेत्र में बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक बना हुआ है। पुतिन ने पिछली बार दिसंबर 2025 में भारत का दौरा किया था, जबकि दोनों नेता इस महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान भी मिले थे। बातचीत की मेज़ पर चर्चा किए गए अहम मुद्दों के बावजूद, पुतिन की शानदार ‘ऑरस सेनेट’ (Aurus Senat) में साथ-साथ की गई उनकी यात्रा ने एक बार फिर दोनों नेताओं की ‘कार कूटनीति’ को चर्चा का केंद्र बना दिया।


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