नक्सलवाद के गढ़ कर्रेगुट्टा में पहली

बीजापुर। Independence Day 2026: छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच एक ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है। कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर आजादी के बाद पहली बार तिरंगा फहराया गया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप बाइक से कर्रेगुट्टा पहुंचे और जवानों की मौजूदगी में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
इस मौके पर बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों के करीब 90 गांवों में भी पहली बार तिरंगा लहराया गया। लंबे समय तक नक्सली प्रभाव वाले इन इलाकों में तिरंगे का पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव और ग्रामीण क्षेत्रों में लौटते भरोसे की बड़ी तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है।

600 किलोमीटर की बाइक यात्रा कर पहुंचे मंत्री
बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और बदले हालात के बीच लोगों के मन से डर दूर करने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप तीन दिवसीय ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ पर निकले थे।
इस दौरान दोनों मंत्रियों ने नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर समेत पांच जिलों में करीब 600 किलोमीटर की दूरी बाइक से तय की। यात्रा के अंतिम चरण में बीजापुर से निकलकर आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पहुंचे।
जवानों के साथ फहराया तिरंगा
कर्रेगुट्टा पहुंचने के बाद उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने सुरक्षा बलों के जवानों से मुलाकात की। इस दौरान शहीद जवानों की स्मृति में पौधरोपण भी किया गया। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया गया।
विजय शर्मा ने इस मौके को अपने जीवन का बेहद महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि जिस इलाके को कभी नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, वहीं आज जवानों के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपने आप में ऐतिहासिक क्षण है।
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ट और सराहनीय सेवा के लिए पदकों से सम्मानित किया है।
वन मंत्री बोले- कभी सोचा नहीं था यहां बिना डर के आ पाएंगे
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक समय ऐसा भी आएगा जब वह बिना किसी भय के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि बदले हुए हालात ने यह संभव किया है और यह बस्तर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
वहीं सांसद महेश कश्यप ने कर्रेगुट्टा में तिरंगा फहराए जाने को ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में लंबे अंतराल के बाद तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहराना लोगों के लिए गर्व की बात है।
गांव-गांव पहुंचे, शहीदों की याद में लगाए पौधे
तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री और सांसद रास्ते में आने वाले गांवों में भी पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की और शहीदों की याद में पौधे लगाए। यात्रा के दौरान शहीदों की मिट्टी भी एकत्र की गई। साथ ही शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल जाना गया।
टेकलगुडेम में भी ग्रामीणों ने किया स्वागत
यात्रा के दूसरे दिन देर रात मंत्री टेकलगुडेम पहुंचे। यह इलाका भी लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। कुख्यात नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती से भी लोग स्वागत के लिए पहुंचे।
भारी बारिश के बावजूद सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा समेत आसपास के गांवों के ग्रामीण देर शाम तक मंत्रियों के स्वागत के लिए मौजूद रहे। इस दौरान विधायक चैतराम अटामी और पूर्व विधायक महेश गागड़ा भी मौजूद रहे।
बस्तर में नक्सल प्रभाव वाले इलाकों तक तिरंगे का पहुंचना और ग्रामीणों की बढ़ती भागीदारी क्षेत्र में बदलते माहौल का संकेत माना जा रहा है। कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराए जाने का यह दृश्य स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बस्तर के लिए एक खास और ऐतिहासिक संदेश लेकर आया है।
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