पति के खिलाफ पत्नी की मनमानी ठीक नहीं, हाईकोर्ट ने भरण पोषण की याचिका ख़ारिज की

याची के अधिवक्ता रजत ऐरन ने दलील दी कि याची की पत्नी निशा अग्रवाल विवाह के कुछ समय बाद ही छोटे बच्चे के साथ ससुराल छोड़कर मायके जाकर रहने लगी और पति के भरसक प्रयास के बाद भी वापस आने को तैयार नहीं हुई। मध्यस्थता के दौरान भी पत्नी द्वारा पति के साथ जाने से स्पष्ट इनकार कर दिया गया। एडवोकेट रजत ऐरन ने कहा कि पत्नी ने भरण पोषण के लिए फैमिली कोर्ट मेरठ के समक्ष सीआरपीसी की धारा 125 का मुकदमा किया। फैमिली कोर्ट ने पति से अलग रहने का वाजिब कारण पत्नी के पास नहीं पाया। फिर भी आठ हजार मासिक भरण पोषण सहानुभूति के आधार पर तय कर दिया गया जो सीआरपीसी की धारा 125(4) का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने पति की निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के गत 17 फरवरी के आदेश को भरण पोषण के मूलभूत प्रावधानों के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया और मामले में फिर से निर्णय के लिए उसे फैमिली कोर्ट मेरठ भेजने का निर्देश दिया।



